सालों से आयुर्वेद जीवन को निरोगी और स्वस्थ बनाने के सिद्धांतों पर काम कर रहा है। आयुर्वेद का मानना है कि जो कुछ है, वो हमारी प्रकृति और हमारे शरीर के भीतर है।

ऐसे में, अगर निरोगी जीवन जीना है, तो सबसे पहले अपने शरीर को आंतरिक तरीके से साफ रखना जरूरी है। आज के भागदौड़ भरे जीवन में, जहां समय कम है और तनाव ज्यादा, वहां शरीर और मन दोनों का संतुलन जरूरी है। आयुर्वेद के अनुसार स्वस्थ जीवन के लिए शरीर और मन दोनों का संतुलन जरूरी है, जिसके लिए आयुर्वेद के पांच सुरक्षा कवच को जानना जरूरी है।

आयुर्वेद में पांच सुरक्षा कवचों में पाचन शक्ति (जठराग्नि), नियमित तेल मालिश, मजबूत श्वसन तंत्र, अच्छी रोग प्रतिरोधक क्षमता (ओज) और मानसिक स्वास्थ्य को शामिल किया गया है। यदि हम अपनी दिनचर्या में योग, प्राणायाम, संतुलित आहार, अच्छी नींद और सकारात्मक सोच को शामिल करें, तो शरीर को कई बीमारियों से बचाया जा सकता है और संपूर्ण स्वास्थ्य बेहतर रहता है। पहले बात करते हैं पाचन शक्ति की। पाचन शक्ति शरीर का सबसे जरूरी अंग है। अगर यह मंद है तो शरीर रोगों का शिकार होना शुरू हो जाता है और अगर पाचन शक्ति संतुलित है तो शरीर को आहार से मिलने वाला भरपूर पोषण मिलता है। इसके लिए अपने आहार में अलग-अलग रसों को शामिल करें और देसी घी को भी अपने आहार में शामिल करें।

दूसरा नंबर पर है नियमित तेल मालिश। शरीर को अंदर से स्वस्थ रखने के साथ-साथ ऊपर देखभाल देना भी जरूरी है। त्वचा हमें बाहरी प्रभाव से बचाती है। ऐसे में रोजाना शरीर की तेल मालिश करें। इससे रक्त का संचार बना रहेगा और त्वचा को गहराई से पोषण मिलेगा। तीसरे नंबर पर आता है मजबूत श्वसन तंत्र। श्वसन तंत्र का मजबूत होना बहुत जरूरी है, क्योंकि आज की जहरीली हवा में बीमारियों से बचते हुए शुद्ध सांस शरीर को देना बहुत जरूरी है। ऐसे में रोजाना प्राणायाम करें और आहार में कच्ची हल्दी, तुलसी, और आंवला का सेवन करें।

चौथे नंबर पर है अच्छी रोग प्रतिरोधक क्षमता। रोग प्रतिरोधक क्षमता अच्छे आहार और शारीरिक गतिविधियों पर आधारित होती है। इसके लिए शतावरी, गिलोय, अश्वगंधा, और आंवला जैसी चीजों को शामिल करें। पांचवा और आखिरी है मानसिक स्वास्थ्य। तनाव शरीर को बहुत प्रभावित करता है। भले ही आप कितना अच्छा आहार लें, लेकिन अगर तनाव से जूझ रहे हैं तो सब बेकार है। इसके लिए खुद को सकारात्मक रखने की कोशिश करें और अच्छी और गहरी नींद लें।