भोपाल की रहने वाली हर्षा रिछारिया पहले एक एंकर, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और मेकअप आर्टिस्ट के रूप में काम करती थीं। वह अपने ग्लैमरस अंदाज और सोशल मीडिया पर एक्टिव रहने के कारण जानी जाती थीं। वहीं, 19 अप्रैल को हर्षा उज्जैन पहुंचीं। जहां मंगलनाथ मंदिर के पास स्थित गंगाघाट पर उन्होंने विधि-विधान से संन्यास लिया। उन्होंने मोनी तीर्थ पीठाधीश्वर सुमनाजी महाराज से दीक्षा प्राप्त की।

महाकुंभ से मिली पहचान
महाकुंभ 2025 के दौरान हर्षा की कुछ तस्वीरें और वीडियो सामने आए, जिनमें वह साधु-संतों के साथ भगवा वस्त्रों में नजर आईं। ये तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गईं।
उनकी खूबसूरती को लेकर “खूबसूरत साध्वी” ट्रेंड भी चल पड़ा, जिससे वह अचानक काफी प्रसिद्ध हो गईं। हालांकि, बाद में उनकी पुरानी ग्लैमरस तस्वीरें और एंकरिंग के वीडियो सामने आने पर विवाद भी हुआ। इसके बावजूद वह लगातार चर्चा में बनी रहीं।

संन्यास के बाद मिला नया नाम 
संन्यास लेने के बाद हर्षा रिछारिया का नया नाम हर्षानंद गिरि महाराज रखा गया। अब वह एक साध्वी के रूप में जीवन बिताएंगी।

साध्वी बनने के बाद क्या कहा?
दीक्षा लेने के बाद हर्षानंद गिरि ने बताया कि उन्हें प्रयागराज कुंभ के दौरान ही संकेत मिल गए थे कि उन्हें किस दिशा में आगे बढ़ना है। उन्होंने कहा कि गुरुजी के मार्गदर्शन में उन्होंने संध्या के समय दीक्षा ली और अब वह उनके आशीर्वाद से आगे बढ़ेंगी।

ली गई शपथ
दीक्षा के समय उन्हें यह शपथ दिलाई गई कि वह ऐसा कोई कार्य नहीं करेंगी जिससे उनके संन्यासी जीवन पर कोई कलंक लगे।

खुद का किया पिंडदान
गुरु सुमनानंद जी ने बताया कि संन्यास की पूरी विधि संपन्न कराई गई। इस प्रक्रिया में शिखा और दंड का त्याग किया गया। पितरों के लिए पिंडदान और तर्पण किया गया। साथ ही हर्षा ने खुद का भी पिंडदान किया।