आज की तेज रफ्तार जिंदगी में लगातार बढ़ता तनाव मानसिक शांति के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। ऐसे में योग और प्राणायाम के कई अभ्यास मन को शांत रखने में मदद कर सकते हैं। इन्हीं में भ्रामरी प्राणायाम भी शामिल है, जिसे करने से तनाव कम करने, मन को शांत रखने और एकाग्रता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
‘भ्रामरी’ शब्द का अर्थ ‘भौंरा’ होता है। इस प्राणायाम के दौरान निकलने वाली गुनगुनाहट की आवाज भौंरे की ध्वनि जैसी होती है, इसलिए इसे भ्रामरी नाम दिया गया है। नींद की कमी, बेचैनी या छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा आने जैसी समस्याओं से परेशान लोगों के लिए यह एक सरल अभ्यास माना जाता है। नियमित रूप से कुछ मिनट इसका अभ्यास मन को शांत करने में सहायक हो सकता है।
आयुष मंत्रालय के अनुसार, भ्रामरी प्राणायाम मन को शांत करने और तनाव कम करने में मदद कर सकता है। इसके अभ्यास से गुस्से को नियंत्रित करने और मानसिक बेचैनी कम करने में भी सहायता मिल सकती है। नियमित अभ्यास से दिमाग और तंत्रिका तंत्र को आराम मिलने के साथ सोचने और समझने की क्षमता को बेहतर रखने में मदद मिल सकती है।
प्राणायाम योग की प्राचीन परंपरा का हिस्सा है, जिसमें सांस लेने और छोड़ने की प्रक्रिया को नियंत्रित करने पर ध्यान दिया जाता है। ‘प्राण’ का अर्थ जीवन शक्ति या ऊर्जा और ‘आयाम’ का अर्थ विस्तार या नियंत्रण होता है। योग दर्शन में प्राणायाम को अष्टांग योग का चौथा चरण माना गया है। भ्रामरी का अभ्यास एकाग्रता बढ़ाने में मदद कर सकता है और बच्चों व छात्रों के लिए भी इसे उपयोगी माना जाता है।
भ्रामरी प्राणायाम एक आसान तकनीक है, जिसे आधुनिक जीवन के तनाव के बीच मानसिक शांति पाने के लिए किया जा सकता है। हालांकि, इसका अभ्यास करते समय कुछ सावधानियां जरूरी हैं। इसे खाली पेट या भोजन करने के कुछ घंटे बाद करना बेहतर माना जाता है। कान या साइनस से जुड़ी गंभीर समस्या वाले लोगों को इसका अभ्यास नहीं करना चाहिए, जबकि गर्भवती महिलाओं और हृदय रोग से पीड़ित लोगों को इसे करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए।
भ्रामरी करते समय गुनगुनाहट की आवाज को जबरदस्ती तेज नहीं करना चाहिए, बल्कि इसे सहज रखना चाहिए। अगर अभ्यास के दौरान चक्कर, असहजता या किसी तरह की परेशानी महसूस हो तो तुरंत इसे रोक देना चाहिए। किसी भी स्वास्थ्य समस्या के इलाज के तौर पर इसे अपनाने से पहले योग्य विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है।
