नई दिल्ली। सिगरेट या बीड़ी पीने से स्वास्थ्य (Cigarette or bidi) को होने वाले नुकसान के बारे में आमतौर पर लोग जानते हैं, लेकिन धूम्रपान करने वाले व्यक्ति के आसपास रहने वालों की सेहत पर भी इसका गंभीर असर पड़ सकता है। इसे सेकेंडहैंड स्मोक या पैसिव स्मोकिंग (Passive smoking) कहा जाता है। इसमें व्यक्ति खुद तंबाकू का सेवन नहीं करता, लेकिन आसपास मौजूद धुएं को सांस के जरिए शरीर में पहुंचाता है।
अगर कोई व्यक्ति लंबे समय तक ऐसे वातावरण में रहता है, जहां नियमित रूप से धूम्रपान किया जाता है, तो वह तंबाकू के धुएं में मौजूद हानिकारक रसायनों के संपर्क में आ सकता है। इसका असर उम्र, धुएं की मात्रा और उसके संपर्क में रहने की अवधि जैसे कई कारकों पर निर्भर करता है। बार-बार या लंबे समय तक सेकेंडहैंड स्मोक के संपर्क में रहने से कई स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।
फेफड़ों और सांस पर असर
सेकेंडहैंड स्मोक का सबसे सीधा असर श्वसन तंत्र पर पड़ सकता है। धुएं के संपर्क में आने से सांस संबंधी परेशानियां बढ़ सकती हैं। अस्थमा से जूझ रहे लोगों में इसके कारण लक्षण अधिक गंभीर हो सकते हैं। बच्चों में भी लगातार तंबाकू के धुएं के संपर्क को सांस लेने में परेशानी और बार-बार होने वाले श्वसन संक्रमण से जोड़ा गया है।
दिल और रक्त वाहिकाओं के लिए भी खतरा
पैसिव स्मोकिंग का असर केवल फेफड़ों तक सीमित नहीं रहता। तंबाकू के धुएं में मौजूद पदार्थ हृदय और रक्त वाहिकाओं को भी प्रभावित कर सकते हैं। लंबे समय तक इसके संपर्क में रहने से हृदय संबंधी बीमारियों का जोखिम बढ़ सकता है। इसलिए घर या कार्यस्थल में किसी व्यक्ति के लगातार धूम्रपान करने को सिर्फ उसकी व्यक्तिगत आदत मानकर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
बच्चे सेकेंडहैंड स्मोक के प्रति अधिक संवेदनशील हो सकते हैं। उनके फेफड़े अभी विकास की प्रक्रिया में होते हैं। ऐसे में लगातार धुएं के संपर्क में रहने से उन्हें खांसी, सांस लेने में परेशानी और बार-बार श्वसन संक्रमण जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
अगर घर में कोई व्यक्ति धूम्रपान करता है तो बच्चों को उसके धुएं से दूर रखना जरूरी है। केवल दूसरे कमरे में धूम्रपान करना भी पर्याप्त सुरक्षा नहीं माना जाना चाहिए। बेहतर विकल्प घर को पूरी तरह धूम्रपान मुक्त रखना है।
गर्भावस्था में भी धुएं से बचना जरूरी
गर्भावस्था के दौरान तंबाकू के धुएं से बचना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। महिला खुद धूम्रपान न करती हो, फिर भी यदि वह लगातार सेकेंडहैंड स्मोक के संपर्क में रहती है तो यह चिंता का विषय हो सकता है। इसलिए गर्भवती महिला के आसपास का वातावरण धूम्रपान मुक्त रखना उसके साथ-साथ होने वाले बच्चे के लिए भी बेहतर है।
धुएं से दूरी बनाना ही सबसे बेहतर बचाव
सेकेंडहैंड स्मोक से बचने का सबसे प्रभावी तरीका धूम्रपान वाले वातावरण से दूरी बनाना है। घर, वाहन और कार्यस्थल जैसे स्थानों को धूम्रपान मुक्त रखने से धुएं के अनचाहे संपर्क को कम किया जा सकता है। खासकर बच्चों और गर्भवती महिलाओं को तंबाकू के धुएं से दूर रखना बेहद जरूरी है।
इसलिए धूम्रपान का नुकसान सिर्फ सिगरेट पीने वाले व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता। उसके आसपास मौजूद लोगों को भी इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। यही वजह है कि परिवार और सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान से बचना दूसरों की सेहत के लिए भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
