


उधर भिण्ड जिले के 11 और श्योपुर का एक गांव खाली कराने के साथ ही वहां के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। यहां भिण्ड कलेक्टर छोटे सिंह ने मदद के लिए सेना मांगी है। इसके चलते सेना की एक टुकड़ी भिण्ड जिले के अटेर पहुंची है। मुरैना के राजघाट पर चंबल नदी का जलस्तर 141.5 मीटर पर पहुंच गया है जो खतरे के निशान से 3.5 मीटर ऊपर है। श्योपुर में तीनों हाईवे बंद होने से राजस्थान से संपर्क पूरी तरह से कट गया है।
कोटा बैराज से छोडे गए 7 लाख क्यूसेक पानी से ग्वालियर-चंबल संभाग के तीन जिले श्योपुर, मुरैना और भिण्ड एक बार फिर बाढ की चपेट में आए गए। तीनों जिलों के करीब 100 से अधिक गांव चंबल की बाढ में घिर गए हैं। गांवों में घिरे सैकडों लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया गया है।
मुरैना में पुराने राजघाट पुल के ऊपर से चंबल नदी का पानी बह रहा है। ऐसी स्थिति 13 साल बाद बनी है। वहीं, श्योपुर में तो हालात यहां तक बिगड गए कि पाली-श्योपुर हाइवे के करीब एक किमी हिस्से की निगरानी के लिए बोट चलानी पडी। बाढ के हालात से निपटने के लिए श्योपुर और भिण्ड में सेना तैनात करनी पडी है।
श्योपुर की दो प्रमुख नदियां चंबल और पार्वती खतरे के निशान पर बह रही हैं। पार्वती के उफान में सात दिन से श्योपुर को कोटा से जोडने वाला खातौली पुल और तीन दिन से बारा-मांगरौल को जोडने वाला कुहांजापुर पुल डूबा हुआ है। उधर चंबल नदी में आए उफान से पाली हाइवे पर दांतरदा के पास बनी चिंधाड़ की पुलिया डूब गई और श्योपुर का राजस्थान से पूरी तरह संपर्क कट गया।
यहां चंबल नदी का जलस्तर 200.50 मीटर खतरे के निशान तक जा पहुंचा है। सांड, सूंडी और कीर की सांड गांव टापू बने हुए हैं। इनमें से सांड गांव में 155 लोगों में से 95 को रेस्क्यू टीम ने बाहर निकाल लिया।
मध्यप्रदेश के भिण्ड में राजस्थान के कोटा बैराज डैम से लगातार तीसरे दिन प्रति सेकंड 7 लाख क्यूसेक पानी चंबल नदी में छोडा गया है। इससे नदी उफान पर है। बाढ के हालात को देखते हुए भिण्ड कलेक्टर छोटे सिंह, पुलिस अधीक्षक रूडोल्फ अल्वारेस ने अटेर-सुरपुरा के 11 गांवों को चिन्हित किया है। एक-एक गांव में लोगों को समझाइश देकर बताया, पानी बहुत ज्यादा आएगा। आप लोग गांव से सुरक्षति स्थानों पर चलें। इसके बावजूद ग्रामीण घर छोडने को तैयार नहीं हैं। काफी समझाइश के बाद कुछ ग्रामीण तैयार हुए। देर शाम तक करीब 500 महिलाएं, बच्चों और पुरुषों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया है। कल रविवार रात 10 बजे चंबल नदी का जलस्तर खतरे के निशान 122 से 3 मीटर ऊपर 125 मीटर तक पहुंच गया है। सेना ने भी अटेर में मोर्चा संभाल लिया है।
कलेक्टर छोटे सिंह और पुलिस अधीक्षक रूडोल्फ अल्वारेस अटेर के मुकुटपुरा गांव में मोटर बोट से पहुंचे। कलेक्टर-एसपी ने ग्रामीणों को समझाइश देकर बताया कि इस बार पानी ज्यादा आ रहा है। आप लोगों के लिए सुरक्षित स्थानों पर रहने और खाने-पीने की व्यवस्था की गई है। आप लोग मोटर बोट के जरिए वहां चलें। ग्रामीणों ने कहा साहब हमारे पूरे जीवन की पूंजी यहीं है। हम यहां से चले गए तो मवेशी और अनाज बगैरह कौन रखाएगा। कुछ ग्रामीणों ने कहा कि साहब हम चले गए और किसी ने घर में चोरी कर ली तो क्या करेंगे। लाख समझाने के बावजूद ग्रामीण जाने को तैयार नहीं हुए। कलेक्टर ने कहा गांधी सागर डैम से कोटा बैराज में 16 लाख क्यूसेक पानी छोडा गया है। कोटा बैराज से चंबल में लगातार पानी छोडा जा रहा है। ग्रामीण बात नहीं माने। दोपहर करीब 12 बजे जब पानी और बढ गया तो सबसे पहले देवालय गांव में आंगनबाडी केंद्र में काम कर रहे पूरन निवासी ललितपुर झांसी और उसके साथ 7 मजदूरों को मोटरबोट के जरिए सुरक्षित निकाला गया। निरीक्षक उदयभान यादव ने इन्हें सुरक्षित स्थान पर भिजवाया। नावली वृंदावन निवासी संदीप यादव ने जिला पंचायत सीईओ आरपी भारती से कहा गांव में मवेशी और बच्चे बीमार हैं। सीईओ भारती ने मेडिकल टीम गांव भेजी। दोपहर बाद जैसे-जैसे पानी बडा अटेर के मुकुटपुरा, नावली वृंदावन, देवालय, दिन्नापुरा से ग्रामीणों को मोटर बोट के जरिए बाहर लाया जाने लगा। सुरपुरा के कोषण की मढैया, रमा कोट, चिलोंगा, नखनौली की मढैयन से भी ग्रामीणों को मोटर बोट से निकाला गया। सुरपुरा इलाके के लोगों को ठहराने की व्यवस्था रोशनलाल दैपुरिया कॉलेज में की गई है।
भिण्ड कलेक्टर छोटे सिंह व पुलिस अधीक्षक रूडोल्फ अल्वारेस ने चंबल नदी किनारे के 8 गांव अटेर के मुकुटपुरा, नावली वृंदावन, देवालय, दिन्नापुरा, सुरपुरा में कोषण की मढैया, रमा कोट, चिलोंगा, नखनौली की मडैयन को हाईरिस्क वाले गांव के रूप में चिन्हित कर लिया है। इन गांवों में पुलिस-प्रशासन के जवानों को तैनात करने का दावा किया गया है। कलेक्टर ने लोगों को समझाइश दी है कि यदि किसी तरह का खतरा हो तो रात में भी रेस्क्यू किया जाएगा। देर शाम ग्वालियर से सेना के 70 जवान अटेर पहुंचे। कलेक्टर-एसपी ने सेना को हाईरिस्क वाले गांवों का मुआयना करा दिया है, ताकि बाढ के ज्यादा हालात बने तो सेना तत्काल अपना काम शुरू कर देगी।
चंबल नदी किनारे के गांवों में बाढ के हालात को देखते हुए कल रविवार को चंबलरेंज के पुलिस उपमहानिरीक्षक (डीआईजी) अशोक गोयल भी भिण्ड आ गए। डीआईजी ने भिण्ड के एडीशनल एसपी संजीव कंचन के साथ जायजा लिया है। अटेर विधायक डॉ अरविंद भदौरिया, कांग्रेस नेता मनोज दैपुरिया, देवेश शर्मा सोनू भी बाढ ग्रस्त इलाके में लोगों के बीच पहुंचे। इधर अटेर के गांवों से जब लोग निकलने को तैयार नहीं हुए तो प्रशासन ने समझाइश के लिए पत्रकारों का भी सहारा लिया। सभी ने मिलकर ग्रामीणों को समझाया तब वे घर छोडने को तैयार हुए।
भिण्ड कलेक्टर छोटे सिंह ने बताया कि देर शाम तक करीब 500 लोगों को बाढ के खतरे वाले गांवों से निकालकर सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया है। सेना के साथ हमें 6 बोट और मिल गई हैं। एसडीआरएफ की टीम भी लगातार काम कर रही है। हम पूरी तरह से अलर्ट हैं। अमले को गांव में तैनात किया है।
भिण्ड पुलिस अधीक्षक रूडोल्फ अल्वारेस ने बताया कि हमारी टीमें लगातार ग्रामीणों के संपर्क में हैं। सभी को सुरक्षति स्थानों पर आने के लिए कहा जा रहा है। चंबल पुल पर भी निगरानी बढ़वा दी है। बाढ के हालात को देखते हुए अतिरिक्त बल भी अटेर और सुरपुरा में तैनात किया गया है।
