ग्वालियर। मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश और राजस्थान में आतंक का पर्याय रहे दस्यु सरगना मोहर सिंह गुर्जर ने 6 सितम्बर को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर के कहा है कि मध्यप्रदेश के मुरैना के बटेश्वरा मंदिर का जीर्णोद्वार करवाया जाए। मुरैना के बटेश्वर में गुप्तकाल से गुर्जर प्रतिहार काल के करीब 200 मंदिर जीर्ण-शीर्ण हालत में बिखरे पड़े हैं, लेकिन उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है।
बटेश्वर मंदिरों की श्रृंखला मुरैना के दूर दराज इलाकों में स्थित है. इस इलाके में पहले कुख्यात डाकू निर्भय सिंह गुर्जर, मोहर सिंह, मानसिंह, लोकमान दीक्षित (लुक्का) और तहसीलदार सिंह का दबदबा था. लेकिन अब डाकुओं के सरदार रह चुके मोहर सिंह का कहना है कि इन ऐतिहासिक मंदिरों का जीर्णोद्वार कराया जाए ताकि युवाओं को पता हो कि उनकी ऐतिहासिक धरोहरें कितनी समृद्ध थी। आर्कोलोजिकल सर्वे ऑफ इंडिया ने बटेश्वर मंदिर के जीर्णोद्वार का काम 2005 में शुरू किया था. उस वक्त के ग्वालियर जोन के डायरेक्टर रहे केके मोहम्मद ने इन मंदिरों के जीर्णोद्वार में अहम भूमिका भी निभाई थी, लेकिन 2013 के बाद मंदिर के जीर्णोद्वार का काम रुका पड़ा है. इस इलाके में चल रहे अवैध खनन और चोरों के चलते गुप्त काल से लेकर गुर्जर काल के इन मंदिरों का अस्तित्व संकट में आ गया है।
दस्यु सम्राट मोहर सिंह साठ के दशक में बीहड़ों में आतंक का पर्याय रह चुके हैं। उनके ऊपर हत्या और लूट के करीबन 500 सौ मुकदमे दर्ज थे और बीहड़ में उस वक्त डाकू मोहर सिंह के सिर पर दो लाख का ईनाम रखा गया था। लेकिन 1972 में जय प्रकाश नारायण के आह्वान पर डाकू मोहर सिंह ने आत्मसमर्पण कर दिया था. कई साल तक मध्यप्रदेश के ग्वालियर संभाग के अशोकनगर जिले के मुंगावली की खुली जेल में रहने के बाद आजकल भिण्ड जिला मुख्यालय से 18 किलोमीटर दूर मेहगांव में रहकर अपना जीवन व्यतीत कर रहे है। मोहर सिंह गुर्जर 85 साल की उम्र में भी अभी भी बिना किसी सहारे व लाठी के चलते फिरते है। मोहर सिंह मेहगांव नगर परिषद के अध्य़क्ष भी रह चुके है।
