ग्वालियर। मध्यप्रदेश के ग्वालियर आरपीएफ के जवानों ने उत्तरप्रदेश के इटावा से अपहरण कर लाई गई 13 साल की मासूम लड़की को तो मुक्त करा लिया, लेकिन उस गिरोह के बारे में पुलिस को कुछ नहीं पता जो ग्वालियर में आराम से रह रहा है। आरपीएफ इसे अपनी सजगता और सफलता मान रही है जबकि यह पुलिस की बिफलता है। इसके पीछे का सच यह है कि मासूम लड़कियों को अपहृत कर ग्वालियर लाया जा रहा है। अब पुलिस का काम है कि वो इस गिरोह की असलियत पता करे।

आरपीएफ को मिली इस नाबालिग ने पूरी कहानी बयां की। गुरुवार को इटावा से ग्वालियर पहुंचे पिता को नाबालिग बच्ची को उनके सुपुर्द कर दिया। ग्वालियर आरपीएफ प्रभारी केएस मीणा ने बताया कि उत्तरप्रदेश के इटावा स्टेशन रोड निवासी शिवशंकर सिंह का इसी रोड पर बाइक सर्विस सेंटर है और पास में ही उनका निवास है। शिवशंकर सिंह की तेरह वर्षीय नाबालिग घर के बाहर टहल रही थी तभी उसके पास एक बुर्काधारी महिला पहुंची और नाबालिग से कहा कि तुम यहां घूम रही हो जबकि तुम्हारी मां स्टेशन पर इंतजार कर रही है। बुर्काधारी महिला की बात सुन नाबालिग उसके साथ स्टेशन पहुंच गई। अगवा करने के इरादे से यह बुर्काधारी महिला उसे लेकर ग्वालियर जा रही ट्रेन में सवार हो गई।

जब यह महिला इस नाबालिग को लेकर ग्वालियर स्टेशन पर पहुंची और नाबालिग को लेकर प्लेटफार्म के मुसाफिर खाने की ओर बढ़ रही थी तभी मुसाफिर खाने में गश्त कर रहे आरपीएफ के सहायक उपनिरीक्षक आरके राय की नजर गुमसुम दिख रही नाबालिग पर जा पड़ी। आरपीएफ के जवानों को देख बुर्काधारी महिला मौके से भाग निकली। रात में ही नाबालिग के परिजनों को आरपीएफ ने उसके ग्वालियर होने की सूचना दी, सूचना मिलते ही गुरुवार को उसके पिता शिवशंकर सिंह आरपीएफ थाने पहुंचे, जहां आरपीएफ ने नाबालिग को उनके सुपुर्द कर दिया। जब ट्रेन में नाबालिग को मां नहीं मिली तो महिला ने उससे कहा कि तुम्हारी मां इंतजार करने के बाद दूसरी ट्रेन में सवार होकर चली गई है और उन्होंने तुम्हें मेरे साथ ग्वालियर चलने को कहा है। महिला की बात सुनकर वह शांत हो गई।

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