ग्वालियर। सीएए, एनपीआर और एनआरसी देश के हित में नहीं है। संविधान को बचाने के लिए सभी राज्य सरकारों को इसका विरोध करना चाहिए। इसके जरिए सरकार देश में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण को तेज करना चाहती है और नफरत का माहौल पैदा करना चाहती है। यह बात गुरूवार को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं राज्यसभा सदस्य दिग्विजय सिंह ने पत्रकार वार्ता में कही । दिग्विजय सिंह ने कहा कि कि प्रदेश की कांग्रेस सरकार भी जल्दी सीएए,एनपीआर व एनआरसी के खिलाफ प्रस्ताव पास करेगी। इसके लिए मुख्यमंत्री से बात हो चुकी है और आने वाली विधानसभा में यह प्रस्ताव पेश किया जायेगा।
राम मंदिर निर्माण का ट्रस्ट पर कहा कि सरकार ने सही तरीके से इसे नहीं बनाया है, इसमें रामाश्रय संप्रदाय और अखाड़ा परिषद के संतों को शामिल करना चाहिये लेकिन इसमें अफसरों और विश्व हिंदू परिषद के लोगों को शामिल कर लिया। इन लोगों का सनातनी हिंदुओं से क्या जुड़ाव है।
दिग्विजिय सिंह गुरुवार को ग्वालियर में सीपीआई (एम) के द्वारा आयोजित सीएए विरोधी रैली में हिस्सा लेने ग्वालियर आए थे। उन्होंने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि ‘कांग्रेस वर्किंग कमेटी ने पहले ही सीएए,एनपीआर व एनआरसी का देशव्यापी विरोध कर रही है। इसलिए मप्र सरकार भी इसके खिलाफ है। इससे पूरे देश की 130 करोड़ की जनसंख्या प्रभावित होगी। मौजूदा एनडीए की सरकार ने कि देश की बिगड़ती आर्थिक स्थिति , बेरोजगारी से ध्यान हटाने के लिए सीएए,एनपीआर व एनआरसी को सामने लेकर आए हैं और इसका देशव्यापी विरोध हो रहा है।
मुंबई के 26/11 के आंतकी हमलों पर हिंदू आतंकवाद की कहानी गढ़ने पर उनका कहना था कि वे भाजपा के दो प्रवक्ताओं, जीवीएल नरसिम्हा राव और अमित मालवीय के खिलाफ मानहानि का नोटिस भेज रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह छह साल से राज्यसभा सदस्य रहे हैं और अब तो पिछले पांच सालों से एनडीए की सरकार है, मेरे खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की। मैं अभी भी उन्हें कार्रवाई की चुनौती देता हूं।
पूरे देश में सीएए,एनपीआर व एनआरसी का विरोध हो रहा है और केन्द्र सरकार ने सीएए कानून बनाकर देश को अस्थिरता में झोंककर ध्रुवीकरण करके सांप्रदायिक राजनीति शुरू कर दी है। इससे कि ‘यह पहली बार हुआ कि देश में नागरिकता को धर्म से जोड़ा गया है और सीएए देश के संविधान पर हमला है, केवल मुसलमान ही नहीं, बल्कि दलित, आदिवासी तक इससे प्रभावित होने वाले हैं।
येचुरी ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि ‘यह पहली बार हुआ कि देश में नागरिकता को धर्म से जोड़ा गया है और सीएए देश के संविधान पर हमला है, केवल मुसलमान ही नहीं, बल्कि दलित, आदिवासी तक इससे प्रभावित होने वाले हैं। इसकी जरूरत क्या थी, सीएए कानून के पहले भी लोगों को भारत की नागरिकता दी गयी। हाल ही में पाकिस्तान के अदनान सामी को भारतीय नागरिकता दी गई।
उन्होंने कहा कि सीएए आगे चलकर एनपीआर और एनआरसी में बदलेगा और ये तीनों आपस में जुड़े हुए हैं। यह भ्रम फैलाया जा रहा है कि एनपीआर केवल जनगणना जैसा है। यूपीए सरकार के समय एनपीआर का प्रोजेक्ट फेल हो गया था। यही कारण है कि देश के 13 राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने सीएए,एनपीआर व एनआरसी का विरोध किया है। ’
येचुरी ने कहा कि ‘जिन राज्यों ने एनपीआर नहीं रोका, वे भी इस काम को रोक दें, क्योंकि इससे देश में अस्थिरता का वातावरण बन रहा है। उन्होंने केन्द्र की भाजपा सरकार पर आरोप लगाया कि देश में ध्रुवीकरण और वोट बैंक की सांप्रदायिक राजनीति की जा रही है और इसके खिलाफ आंदोलन भी तेज हो रहा है।
जनता दूल (यू) के पूर्व नेता शरद यादव का कहना है कि देश में सीएए,एनपीआर व एनआरसी लागू करके केन्द्र सरकार संविधान के विपरीत काम कर रही है। इनके लागू करने से मुसलमानों के साथ दलित आदिवासी, पिछड़ा वर्ग और यहां तक कि सवर्ण समाज को निशाना बन रहे हैं।
यादव ने गुरुवार को ग्वालियर में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि ‘पिछले कुछ महीनों से सरकार ऐसे मुद्दों को उठा रही है, जिससे हिंदुओं और मुसलमानों के बीच एक प्रकार की धार्मिक लड़ाई हो रही है, जबकि देश के सामने बेरोजगारी, आर्थिक मंदी जैसे मुद्दे हैं। नोटबंदी, जीएसटी से वैसे ही लोगों की कमर टूट गई और सीएए जैसे कानून बनाकर सरकार संविधान के विपरीत काम कर रही है।
