समाज में बदलते रिश्तों और बढ़ती दूरी के बीच तेलंगाना सरकार ने एक अहम कदम उठाया है। जहां आज के समय में जब कई बच्चे अपनी ही दुनिया में व्यस्त होकर अपने बुज़ुर्ग माता-पिता को बेसहारा छोड़ देते हैं सरकार ने उनकी तनख्वाह पर सीधे वार करने का फ़ैसला किया है। यह कानून उन लोगों के लिए एक कड़ा सबक है। जिनका हाथ थामकर चलना सीखा, लेकिन जब समय आया तो उन्हीं हाथों को छोड़ दिया। ऐसे में जो लोग इस तरह का बर्ताव करेंगे, उन्हें अब गंभीर नतीजों का सामना करना पड़ेगा। अब अगर कोई व्यक्ति अपने बुजुर्ग माता-पिता की जिम्मेदारी नहीं निभाता, तो उसकी सैलरी से सीधे कटौती की जा सकती है।
कैबिनेट ने दी कानून को मंजूरी
बता दें कि मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी की अध्यक्षता में हुई बैठक में माता-पिता सहायता से जुड़े नए विधेयक को मंजूरी दी गई। इस कानून का मकसद उन बुजुर्गों को आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा देना है, जिन्हें उनके ही बच्चे नजरअंदाज कर देते हैं।
सैलरी से होगी सीधी कटौती
नए नियम के अनुसार, यदि कोई कर्मचारी अपने माता-पिता की देखभाल नहीं करता, तो उसकी सैलरी से 15% या अधिकतम 10,000 रुपये (जो भी कम हो) काटे जा सकते हैं। यह रकम सीधे माता-पिता के बैंक खाते में ट्रांसफर की जाएगी, बशर्ते उन्होंने शिकायत दर्ज कराई हो।
