करवा चौथ का पर्व सुहागिन महिलाओं के लिए आस्था प्रेम और वैवाहिक सुख का प्रतीक माना जाता है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और परिवार की सुख समृद्धि की कामना के साथ निर्जला व्रत रखती हैं। इस वर्ष करवा चौथ 29 अक्टूबर गुरुवार को मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस बार पर्व पर कई शुभ ज्योतिषीय संयोग बन रहे हैं जिन्हें दांपत्य जीवन में प्रेम और मधुरता बढ़ाने वाला माना जा रहा है। रोहिणी और मृगशिरा नक्षत्र का संयोग इस पर्व को विशेष बना रहा है। व्रत रखने वाली महिलाएं सुबह से चंद्रमा के दर्शन तक उपवास करेंगी और शाम को विधि विधान से पूजा करने के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत पूरा करेंगी।

ज्योतिषाचार्य पंडित मुकेश मिश्रा के अनुसार करवा चौथ की चतुर्थी तिथि 28 और 29 अक्टूबर की मध्यरात्रि 1 बजकर 6 मिनट से शुरू होकर 29 अक्टूबर की रात 10 बजकर 6 मिनट तक रहेगी। इस दिन रोहिणी और मृगशिरा नक्षत्र का संयोग बताया गया है। ज्योतिषीय मान्यताओं में रोहिणी नक्षत्र का संबंध चंद्रमा से माना जाता है जबकि मृगशिरा नक्षत्र के स्वामी मंगल हैं। चंद्रमा को शीतलता सुंदरता और मन का कारक माना जाता है जबकि मंगल ऊर्जा और कल्याण से जुड़ा ग्रह है। इसी कारण इन नक्षत्रों का संयोग करवा चौथ के धार्मिक महत्व को बढ़ाने वाला माना जा रहा है।

इस बार ग्रहों की स्थिति को लेकर भी विशेष चर्चा है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार तुला राशि में सूर्य बुध और शुक्र की उपस्थिति से त्रिग्रही योग बनने की बात कही गई है। इसके साथ बुधादित्य और लक्ष्मी नारायण योग का भी उल्लेख किया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ऐसे शुभ योग सुख समृद्धि और वैवाहिक जीवन में सामंजस्य के प्रतीक माने जाते हैं। हालांकि इन योगों का व्यक्तिगत जीवन पर प्रभाव व्यक्ति की जन्मकुंडली और अन्य ज्योतिषीय परिस्थितियों के आधार पर अलग हो सकता है।

करवा चौथ पूजा का शुभ मुहूर्त

करवा चौथ के दिन पूजा का विशेष महत्व होता है। बरेली में पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5 बजकर 38 मिनट से 6 बजकर 56 मिनट तक बताया गया है। इस दौरान महिलाएं करवा माता और भगवान गणेश की पूजा कर सकती हैं। पूजा में करवा चौथ की कथा सुनने और परिवार की सुख समृद्धि की कामना करने की परंपरा है। महिलाएं सोलह शृंगार कर पूजा की तैयारी करती हैं और करवा में जल भरकर विधि विधान से पूजन करती हैं। शुभ मुहूर्त में पूजा करने के बाद चंद्रमा के दर्शन का इंतजार किया जाता है।

चंद्रोदय के बाद पूरा होगा व्रत

बरेली में इस बार चंद्रोदय रात 8 बजकर 2 मिनट पर होने का अनुमान बताया गया है। व्रत का समय सुबह 6 बजकर 31 मिनट से रात 8 बजकर 2 मिनट तक रहेगा। चंद्रमा निकलने के बाद महिलाएं छलनी से चंद्र दर्शन करती हैं और फिर अपने पति का चेहरा देखकर अर्घ्य देती हैं। इसके बाद पति के हाथों जल ग्रहण कर व्रत खोलने की परंपरा निभाई जाती है। चंद्रोदय का वास्तविक समय मौसम और स्थानीय परिस्थितियों के कारण कुछ अलग दिखाई दे सकता है इसलिए अपने शहर के समय की जानकारी अवश्य लें। करवा चौथ केवल उपवास का पर्व नहीं बल्कि पति पत्नी के बीच प्रेम विश्वास और समर्पण का प्रतीक भी है। इस दिन परिवार एक साथ पूजा की तैयारी करता है और त्योहार की खुशियां साझा करता है। शुभ संयोगों के बीच महिलाएं अपने वैवाहिक जीवन में सुख शांति और खुशहाली की कामना करेंगी। व्रत रखने वाली महिलाओं को अपनी सेहत का भी ध्यान रखना चाहिए और व्रत खोलते समय हल्का भोजन तथा पर्याप्त पानी लेना चाहिए।