जबलपुर. मंगलवार को कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा 602 तक पहुंच गया। इसके साथ ही जबलपुर मध्यप्रदेश में सबसे खतरनाक स्थिति में चल रहे इंदौर एवं भोपाल की श्रेणी में आ गया है। पिछले 24 घंटों में 2840 सैंपल की रिपोर्ट प्राप्त हुई हैं। वहीं 5 लोगों की कोरोना से मौत हो गई। इसे मिलाकर जिले में कुल 297 लोग कोरोना से जान गंवा चुके हैं। जबलपुर में कोरोना मरीजों की संख्या 23 हजार 569 तक पहुंच गई है, वहीं एक्टिव केस 3549 हैं।
रिकवरी रेट 84 पर पहुंचा
जिले में रिकवरी रेट पिछले 12 दिनों में लगभग 8 प्रतिशत तक गिर गया है। 31 मार्च की शाम 6 बजे तक जिले में रिकवरी रेट 91.92 प्रतिशत था, जो 13 अप्रैल की शाम को घटकर 84.98 प्रतिशत तक आ गया। लगातार गिरता हुआ रिकवरी रेट बता रहा है कि इस बार कोरोना के नए स्ट्रेन से पीड़ितों के ठीक होने की दर बेहद कम हो रही है।
15 अप्रैल से बंद हो जाएंगी किराना दुकानें
कलेक्टर कर्मवीर शर्मा ने कोरोना संक्रमण की रोकथाम के मद्देनजर आदेश में आंशिक संशोधन कर नगर निगम जबलपुर एवं छावनी परिषद जबलपुर की सीमा क्षेत्र के अंदर सभी किराना दुकानों को 15 अप्रैल से पूर्णतः बंद रखने के आदेश जारी किया है। आदेश गुरुवार 15 अप्रैल से 22 अप्रैल तक प्रभावी रहेगा।
अब घर से सब्जी खरीदने नहीं जा सकेंगे
इसके अलावा नगर निगम एवं छावनी परिषद सीमा क्षेत्र में सब्जी व फल मंडियां व दुकानें अब प्रतिदिन सुबह 4 बजे से सुबह 8 बजे तक ही खुल सकेंगी। इस समयावधि में केवल होलसेलर एवं हाथ ठेला वाले ही इनसे सब्जी एवं फल ले सकेंगे । सब्जी लेने जनसामान्य को घर से बाहर निकलने की अनुमति नहीं होगी। आदेश के अनुसार सुबह आठ बजे के बाद सब्जी एवं फल का विक्रय केवल चलित वाहन (हाथ ठेला या अन्य साधन) के माध्यम से विक्रेता द्वारा फेरी लगाकर घर-घर जाकर विक्रय किया जा सकेगा।
ऐसे पता करें बिस्तरों की उपलब्धता
सरकार द्वारा प्रदेश के अस्पतालों में बिस्तरों की उपलब्धता जानने के लिए http://sarthak.nhmmp.gov.in/ लिंक जारी किया गया है। इसके माध्यम से कोरोना के मरीज अपने जिले के सभी अस्पतालों में मौजूद बेड, ऑक्सीजन बेड आदि की उपलब्धता और कुल क्षमता जान सकते हैं। हालांकि, सरकार द्वारा जारी इस लिंक में बिस्तरों की उपलब्धता की जानकारी ठीक तरह से अपडेट नहीं की जा रही है। पीपुल्स समाचार डिजिटल की टीम ने जब जबलपुर के अस्पतालों में बिस्तरों की उपलब्धता की जानकारी लेनी चाही, तो पाया की कई अस्पतालों के आंकड़ों को अपडेट हुए 24 घंटे से भी ज्यादा का वक्त हो चुका है।
