ग्वालियर। प्रतिभा पर्व पर 50 दिन पहले सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवता आंकने के लिए आयोजित प्रतिभा पर्व के परिणामों ने विभागीय कोशिशों की पोल खोल दी है। भिण्ड जिला खिसक कर 13वें पायदान पर आ गया है। 659 स्कूल ही ए ग्रेड में आ पाए हैं। हालांकि विभाग की ओर से गुणवता में सुधार लाने के लिए रेमेडियल कक्षाएं चालू कराने का दावा किया जा रहा है, लेकिन किसी भी स्कूल में कक्षाएं शुरु नहीं हो पा रही है।
प्रतिभा पर्व के घोषित परिणामों में भिण्ड जिले के परिणाम निराशाजनक रहे है। कुल 1751 प्राथमिक स्कूलों में से 27 फीसदी यानि 659 स्कूल ही ए श्रेणी में आ पाए है। इसके अलावा 10 स्कूलों का परिणाम ई तथा 32 का डी श्रेणी में रहा है। परिणाम खराब आने के बाद विभाग की ओर से शिक्षा की गुणवता में सुधार लाने के लिए सुवह 9.30 से 10.30 बजे तक रेमेडियल कक्षाएं चालू किए जाने का दावा किया जा रहा है, लेकिन विभागीय दावों के विपरीत ई श्रेणी के स्कूलों में शिक्षक तक नियमित अध्यापन कराने के लिए नहीं जा रहे हैं। शासन की लगातार कोशिशों के बाद भी शासकीय स्कूलों में शैक्षणिक गुणवता में कोई सुधार होता नजर नहीं आ रहा हैं यही कारण है कि पालकों का भी शासकीय प्राइमरी स्कूलों से मोहभंग होता जा रहा है। गांव में सरकारी स्कूल होने के बाद भी सैकडों की संख्या में बच्चे प्राइवेट स्कूलों में भर्ती होने के लिए जा रहे है।
जिला शिक्षा केन्द्र भिण्ड के सहायक परियोजना समन्वयक डॉं. पीके दुबोलिया ने आज यहां बताया कि वर्ष 2014-15 में घोषित प्रतिभा पर्व की परीक्षा परिणामों में भिण्ड जिले का स्थान 8वां था, लेकिन वर्ष 2015-16 में भिण्ड का स्थान 13वें स्थान पर आ गया हैं। 32 शालाएं डी तथा 10 ई श्रेणी में आई हैं शिक्षा की गुणवता में सुधार लाने के लिए रेमेडियल कक्षाएं शुरु करा दी गई हैं इनकी मानीटरिंग भी कराई जाएगी।
