
मालवा। मध्यप्रदेश के मालवा संभाग के जिलों में अंचल में बारिश का क्रम जारी रहा। कहीं रिमझिम तो कहीं तेज वर्षा से नदी-नाले उफान पर रहे। बांधों के गेट खोलने से नर्मदा उफान पर है। मोरटक्का में नर्मदा पुल पर तीसरे दिन भी यातायात शुरू नहीं हो सका। इंदौर-खंडवा सहित कई रास्तों पर यातायात अवरुद्ध रहा। बडवानी के राजघाट में नर्मदा का जलस्तर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। उज्जैन जिले में बिजली गिरने से दो लोगों की मौत हो गई। राष्ट्रीय शिरोमणि मुनि विद्यासागर महाराज ने नर्मदा नदी का अवलोकन किया। भारी बरसरत के कारण कई बस्तियों को खाली कराया जाकर लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया है। पुनासा की अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) ममता खेडे ने बताया कि नर्मदा को ऊपरी क्षेत्र से प्रवाह ज्यादा होने और बरगी-तवा बांधों के गेट खोलने से नर्मदा में बाढ है। प्रवाह कम होने और पुल की जांच के बाद ही आवागमन शुरू किया जाएगा। बांध का जलस्तर 193 मीटर पर है।
खंडवा शहर की तीन पुलिया में भरे पानी में एक वृद्ध बह गया। होमगार्ड की टीम दिनभर तलाशती रही। इंदिरा सागर बांध के 12 गेटों से 20 हजार 800 क्यूमेक्स पानी छोडा जा रहा है। वहीं ओंकारेश्वर बांध के 18 गेटों से 23 हजार क्यूमेक्स पानी छोडे जाने से नर्मदा उफान पर है। मोरटक्का में नर्मदा का जलस्तर 166.550 मीटर है, जबकि 167 मीटर के बाद पानी पुल को छूने लगता है।
बडवानी में मंगलवार शाम नर्मदा का जलस्तर अब तक के रिकॉर्ड 136.800 मीटर पर पहुंच गया है। इससे पूर्व 1970 में जलस्तर 136.680 मीटर तक पहुंचा था। जिला प्रशासन ने अब तक सबसे बडा रेस्क्यू ऑपरेशन करते हुए राजघाट के टापू बने हिस्से से 20 परिवारों को सामान सहित बाहर निकाला। इस दौरान हंगामा भी हुआ।
उज्जैन में बडे पुल से शिप्रा 5-6 फीट नीचे बह रही है। नागदा के समीप बिजली गिरने से ग्राम खजूरिया में दो चचेरे भाइयों की मौत हो गई। वहीं कायथा में छोटी कालीसिंध नदी पार करते समय तेज बहाव में बहने से एक युवक की मौत हो गई।
धार जिले के नालछा में दोपहर करीब एक घंटे में तीन इंच से ज्यादा बारिश हुई। साप्ताहिक हाट बाजार प्रभावित हुआ और दुकानों में पानी घुस गया। सुसारी में भी तेज बारिश से 30 साल बाद नाले का पानी गांव की सड़कों व घरों के सामने से बह निकला। सुसारी-डही मार्ग 6 घंटे तक बंद रहा। मांडू मार्ग पर एक घंटे आवाजाही प्रभावित रही।
शाजापुर रू लगातार तीसरे दिन रिमझिम और तेज बारिश चीलर, लखुंदर और कालीसिंध नदी उफान पर, जिले में अब तक 53.8 इंच बारिश दर्ज हो चुकी है। यहां 1973 में 71 इंच और 2006 में 72 इंच हुई थी बारिश।
रतलाम जिले में छोटी पुल-पुलियाओं और रपटों पर पानी आने से कई रास्ते आठ से दस घंटे तक अवरुद्ध रहे। निचली बस्तियों के घरों और खेतों में पानी घुस गया।
