छतरपुर। मध्यप्रदेश के छतरपुर में आंगनबाडी कार्यकर्ता के पद पर चयन न होने से हताश युवती ने जनसुनवाई में कलेक्टर से इच्छामृत्यु की मांग की। उसने बकायदा इसके लिए कलेक्टर को आवेदन भी दिया और कलेक्ट्रेट परिसर में अपनी परेशानी बताते हुए रो पड़ी। कलेक्टर मोहित बुंदस जनसुनवाई में व्यस्त होने के वाबजूद युवती को एक घंटे तक मनाते रहे। उन्होंने अपने और दोस्तों के संघर्ष की कहानियां सुनाईं, तब जाकर युवती को मना पाए।
कलेक्टर ने उसे समझाते हुए कहा कि आत्महत्या किसी भी समस्या को हल करने का रास्ता नहीं है। उन्होंने युवती के सामने कई उदाहरण रखे और प्रेरणादायक कहानियां सुनाईं। इसके बाद ही युवती मानी और वापस लौट गई।
राजनगर निवासी आदिवासी युवती केशकला ने आंगनबाडी कार्यकर्ता के लिए आवेदन किया था, परंतु उसका चयन नहीं हो सका। इससे परेशान होकर वह मंगलवार को जनसुनवाई में पहुंची। उसने कलेक्टर को बताया कि उसने आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बनने के लिए आवेदन दिया था, लेकिन उसका चयन नहीं हुआ। इसकी वजह भ्रष्टाचार है, अयोग्य लोगों का चयन हो गया, लेकिन उसका नहीं हुआ। ऐसा कहते हुए वह रोने लगी।
कलेक्टर मोहित बुंदस ने केशकला को अपनी आपबीती सुनाई। उन्होंने कहा कि उनके पिताजी बचपन में गुजर गये थे। इसके बाद उनकी मां ने कितनी कठिनाइयों से हम सभी भाई-बहिनों का पालन-पोषण किया। उनके संघर्ष से मैं आईएएस बना। अगर मेरी मां सोच लेती कि मेरे पति नहीं हैं, मैं बच्चों को कैसे पालूं। मां हार मानकर बैठ जाती तो क्या आज मैं आईएएस होता। उन्होंने संघर्ष किया और उसका फल मिला। कलेक्टर ने कहा अच्छे और बुरे दोनों तरह के दिन आते है। इंसान में संघर्ष की क्षमता हो और वह कभी हार न मानें तो जीत उसका इंतजार कर रही है।
