खरगोन। मुआवजा व पुनर्वास की मांग को लेकर खारक बांध के डूब प्रभावितों का तीसरे दिन बुधवार भी आंदोलन जारी रहा। दोपहर में कलेक्टर ने पूरे निमाड से आंदोलनकारियों के जुटने की आशंका को देखते हुए दोपहर तीन बजे कलेक्टोरेट में धारा 144 लगा दी। आंदोलनकारियों के गुस्से को देखते हुए कलेक्टर कोर्ट के गेट पर ताला लगा दिया गया। गेट पर पुलिसकर्मी तैनात रहे। आंदोलन कर रहे 175 प्रभावितों को रात गिरफ्तार कर लिया। कलेक्टोरेट के बाहर पुलिस के 3 वाहन खडे थे। इसमें सभी को जिला जेल भेज दिया गया।
इनमें महिलाएं व 10 बच्चे भी शामिल हैं। जिला जेल में क्षमता कम होने के कारण जेल के कार्यक्रम हॉल में आंदोलनकारियों को रखा गया। उधर, एसडीएम अभिषेक गेहलोत का कहना है कि आंदोलनकारी हिंसक हो रहे थे। आशंका थी कि वे खुद को नुकसान भी पहुंचा सकते हैं। एहतियातन गिरफ्तारी की गई हैं। बांध प्रभावित आंदोलनकारी नेताओं ने मंगलवार को प्रशासन को चेतावनी दे दी थी कि यदि सख्ती बरती गई तो निमाड भर के आंदोलनकारी खरगोन की सडकों पर आंदोलन करने उतरेंगे। संभवतः इसी कारणा प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए गए हैं।
सरकार ने प्राधिकरण के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में की अपील। अब तक 15 डूब प्रभावितांे की मौत भी हो चुकी है।

आंदोलन नेत्री माधुरी बेन ने बताया कि 5 जनवरी 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने तीन जिला न्यायालय के सेवानिवृत्त जजों का शिकायत निवारण प्राधिकरण (जीआरए) का गठन कर पात्र प्रभावितों की जांच कर तीन माह में मुआवजा व पुनर्वास राशि दिलाने के आदेश दिए थे। प्राधिकरण ने 129 लोगों को पात्र मानते हुए उनके आदेश दिए थे। जबकि 97 प्रभावितांे को जांच मंे रखा था। इसी दौरान सरकार ने प्राधिकरण को भंग कर दिया और जिला न्यायालय के ही जज का नया प्राधिकरण बनाकर वहां अपील कर दी। इसकी अपील सुप्रीम कोर्ट मंे ही कर सकते हैं। सरकार की अपील ढोंगी व्यवस्था है, इसे खत्म करो। सुप्रीम कोर्ट के विधिवत आदेश का पालन कीजिए।

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