ग्वालियर। शादी के पवित्र रिश्ते में बंधते समय पति-पत्नी सात जन्मों तक साथ रहने और साथ ही मरने की कसमें खाते है, लेकिन इन कसमों को हर कोई निभा नहीं पाता है। लेकिन भिण्ड शहर के जवाहर मार्केट में रहने वाले जवाहर लाल जैन ने शादी के दौरान सात फेरे लेते समय साथ जीने मरने का जो वादा किया था उसे निभा कर के भी दिखा दिया। कल पत्नी के निधन के बाद उनका अंतिम संस्कार किया गया फिर कुछ घण्टों बाद पति ने भी अपने प्राण त्याग दिए।
भिण्ड के जवाहर मार्केट में रहने वाले जवाहर लाल जैन की पत्नी श्रीमती लाली 82 वर्ष का कल सुवह निधन हो गया। पत्नी के निधन के बाद पति को ऐसा सदमा लगा कि उन्हें तत्काल भिण्ड के शासकीय जिला चिकित्सालय के आईसीयू वार्ड में भर्ती कराया गया। श्रीमती लीला को उनके परिजन व रिश्तेदार उनको अंतिम संस्कार के लिए श्मसान घाट ले गए। तभी जवाहरलाल जैन ने जिद की, कि वह अपनी पत्नी का अंतिम संस्कार में शामिल होंगे तथा उनको अंतिम विदाई देंगे। जवाहरलाल को चिकित्सालय से श्मसान घाट गाडी में ले जाया गया। जहां पत्नी के अंतिम संस्कार की सारी रस्में पूरी कर पुनः अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां हालत बिगडने पर उन्हें शाम को ग्वालियर रैफर कर दिया। तो उनका भी रास्ते में निधन हो गया। जवाहरलाल जैन 85 वर्ष का भी फिर कल ही अंतिम संस्कार कर दिया गया। श्मसान घाट पर सुवह पत्नी की आग ठण्डी भी नहीं हो पाई थी कि पति को भी अंतिम विदाई दे दी गई। 63 साल तक एक साथ जीवन विताने के बाद साथ ही कुछ घण्टों के अंतर से दोनों विदा भी हुए।
जवाहरलाल जैन और उनकी पत्नी श्रीमती लाली अपने सात पुत्र एक पुत्री के अलावा एक दर्जन से अधिक नाती पोतों को साथ ही भरापूरा परिवार छोड गए है।
