सागर। नशे की लत और रातों-रात अमीर बनने की चाहत इंसान को किस हद तक गिरा सकती है, इसका एक रोंगटे खड़े कर देने वाला मामला मध्य प्रदेश के सागर जिले से सामने आया है। यहां एक कलयुगी बेटे ने अपने ही दोस्तों के साथ मिलकर खुद के ही अपहरण का ड्रामा रच डाला। हद तो तब हो गई जब आरोपियों ने युवक के पिता को फोन कर एक लाख रुपये की फिरौती मांग ली। हालांकि, सागर पुलिस और साइबर सेल की मुस्तैदी के आगे यह साजिश महज ढाई घंटे भी नहीं टिक सकी।

पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, देवरी थाना क्षेत्र का रहने वाला पवन जाटव 9 जून को अपने तीन दोस्तों के साथ ऑल्टो कार से सागर आया था। बहाना था जन्मदिन मनाने का। दोस्तों की इस टोली में सिख समुदाय का एक युवक भी शामिल था। सागर में पार्टी के दौरान ही चारों दोस्तों ने मिलकर आसान तरीके से मोटी रकम ऐंठने का एक शॉर्टकट प्लान तैयार किया और खुद के अपहरण की झूठी कहानी गढ़ दी।

गुरुवार दोपहर को पवन के साथियों ने उसके पिता राकेश जाटव को फोन किया। फोन पर भारी आवाज में धमकी देते हुए कहा गया कि उनके बेटे पवन का अपहरण कर लिया गया है। अगर उसे सुरक्षित देखना चाहते हो, तो तुरंत एक लाख रुपये का इंतजाम करो। बेटे के किडनैप होने की खबर से पिता राकेश जाटव घबराए जरूर, लेकिन उन्होंने सूझबूझ दिखाई और बिना वक्त गंवाए सीधे पुलिस को मामले की इत्तला दे दी।

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सागर पुलिस और साइबर सेल तुरंत एक्टिव मोड में आ गई। तकनीकी सर्विलांस और मोबाइल टावर लोकेशन के जरिए पुलिस ने जाल बिछाया। महज ढाई घंटे के भीतर पुलिस टीम को आरोपियों की सटीक लोकेशन राजघाट रोड स्थित किशोर संप्रेक्षण गृह के पास पहाड़ी पर मिली। पुलिस ने जब वहां दबिश दी, तो नजारा देखकर दंग रह गई। कथित अपहृत पवन अपने उन्हीं दोस्तों के साथ बैठकर आराम से समय बिता रहा था।

पुलिस की गिरफ्त में आते ही जब चारों से कड़ाई से पूछताछ की गई, तो इस पूरी साजिश के पीछे की असली और काली हकीकत सामने आ गई। दरअसल, सागर पुलिस को शहर में गांजे की एक बड़ी खेप आने का इनपुट पहले से मिला था, और एक विशेष टीम इस पर काम कर रही थी। पकड़े गए मुख्य आरोपी पवन जाटव ने कुबूल किया कि वह पहले भी गांजा तस्करी के मामले में जेल जा चुका है।

उसने पुलिस को बताया कि वह इस बार बड़े पैमाने पर गांजे का अवैध कारोबार शुरू करना चाहता था। इस काले धंधे को शुरू करने के लिए उसे मोटी पूंजी (रकम) की जरूरत थी। जब कहीं से पैसों का इंतजाम नहीं हुआ, तो उसने अपने ही पिता से रकम ऐंठने के लिए खुद के अपहरण की यह खौफनाक साजिश रच डाली।

सूत्रों के मुताबिक, इस हाई-प्रोफाइल और संवेदनशील मामले को लेकर मोतीनगर पुलिस दोपहर से ही पूरी गोपनीयता बरत रही थी। देर रात तक पुलिस के आला अधिकारी मामले की कड़ियों को जोड़ने में लगे रहे। फिलहाल चारों युवकों को हिरासत में लेकर मोतीनगर थाने में रखा गया है, जहां उनसे गहन पूछताछ की जा रही है।

मामले की जानकारी देते हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक लोकेश कुमार सिन्हा ने बताया कि इस संबंध में देवरी थाने में संबंधित धाराओं में अपराध दर्ज कर लिया गया है। मामला बेहद संदिग्ध है और पुलिस हर एक पहलू की बारीकी से जांच कर रही है। पुलिस को अंदेशा है कि इस रैकेट में कुछ अन्य आरोपी भी शामिल हो सकते हैं, जिनकी तलाश की जा रही है।