सागर ! जिले में सूखे की आहट से लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के एक बार फिर वारे-न्यारे होने के आसार नजर आ रहे हैं। बुंदेलखंड पैकेज में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को मिले भारी भरकम बजट के बाद भी जिले की स्थिति में कोई खास सुधार नहीं आया है। बुंदेलखंड पैकेज मिलने से पहले जिले में पेयजल व्यवस्था की स्थिति थी, लगभग ऐसी ही स्थिति पैकेज की करोड़ों रूपए की राशि ठिकाने लगने के बाद बनी हुई है।
विभाग की मनमानी से सभी परेशान: भाजपा और कांग्रेस के जनप्रतिनिधि लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की कार्यशैली से काफी परेशान हैं, क्योंकि जनता के बीच जाकर जबाव उन्हें देना पड़ता है। जिले में जनवरी माह से ही पीने के पानी त्राही मची हुई है जो आने वाले समय में विकराल रूप ले लेगी।
सत्तापक्ष के विधायक नरयावली विधानसभा के प्रदीप लारिया स्वयं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की कार्यशैली से पीडि़त हैं। उनका कहना है कि विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की मनमर्जी के चलते जिले में पेयजल संकट पनप रहा है विभाग केवल एक स्थान से उठाकर दूसरे स्थान पर पंप और राईजिंग पाईप सिफ्ट करने में लगा हुआ है।
ऐसी ही स्थिति जिले में कांग्रेस पार्टी से एक मात्र विधायक हर्ष यादव ने बताई। श्री यादव का कहना था कि विधानसभा क्षेत्र में बुंदेलखंड पैकेज से बनाई गई लगभग सभी नलजल योजनाओं का पता नहीं है। विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार चर्म सीमा पर है। जिसका खामयाजा क्षेत्रवासियों को भुगतना पड़ रहा है।
पैकेज की राशि हजम, फिर भी नहीं मिला पेयजल: वहीं पीएचई विभाग 5 साल से पेयजल समस्या से निजात पाने के लिए कागजी घोड़े दौड़ा रहा है। जमीनी स्तर पर लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग पेयजल संकट को मिटाना तो दूर थोड़ी बहुत उपलब्धि भी नहीं दिखा पाया। केन्द्र ने लगभग 5 साल पहले बुंदेलखंड को सूखे से उवारने के लिए करोड़ों रूपए का पैकेज जिले को दिया था। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने सारी राशि ठिकाने लगाते हुए जिले में कार्य दर्शा दिए लेकिन हकीकत यह है कि हालात में कोई खास सुधार नहीं आया है।
शासकीय खजाने से फिर मांगे 15 करोड़: इस बार फिर लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने शासन को प्रस्ताव भेजकर लगभग 15 करोड़ रूपए की राशि भेजने की मांग की है। विभाग द्वारा भेजे गए प्रस्ताव से स्पष्ट होता है कि लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग जिले में उत्पन्न हो रहे सूखे के हालातों की आड़ में एक बार फिर मोटी राशि ठिकाने लगाने के मूड में है। जिले को बुंदेलखंड पैकेज मिलने से जिले वासियों को यह सुखद अनुभव हो रहा था कि अब शायद सूखे के दिनों में लोगों को कम से कम पीने के पानी के लिए दर-दर नहीं भटकना पड़ेगा, लेकिन पेयजल समस्या से निजाद पाने के लिए आज भी पूरे जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में ग्रामवासी दर-दर भटक रहे हैं। इन्हीं हालातों का फायदा उठाने के लिए शायद लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने अपने वरिष्ठ कार्यालय को प्रस्ताव भेजा है। इस प्रस्ताव में उल्लेख किया गया है कि जल संकट वाले गांव में नए नलकूप खोदने और हैंडपंप स्थापना के लिए जिले के सभी 11 विकास खंड़ों में 30-30 नलकूप खोदे जाना है। प्रस्ताव में 1 नलकूप पर खोदने पर 1 लाख 20 हजार रूपए की दर से 396 लाख रूपए की राशि प्रस्तावित की है।
प्रस्ताव में सभी मदों का किया उल्लेख: वहीं जल संकट वाले गांव में नए नलकूप खनन पावर पंप स्थापना के लिए प्रत्येक विकास खंड में 275 लाख रूपए की राशि से 10-10 नलकूप, जहां जल स्तर घटा है वहां सिंग्ल फेस पंप स्थापना के लिए 1 लाख 20 हजार रूपए की दर से 110 नलकूप पर 132 लाख रूपए की मांग की है। हैंडपंपों में राईजर पाईप का विस्तार करने के लिए जिले के सभी 11 विकास खंडों में 30 लाख रूपए, 100 नलकूपों की सफाई के लिए 10 लाख रूपए, नलजल योजनाओं का संधारण कार्य एवं नवीन श्रोत निर्माण करने के लिए सर्वाधिक 490 लाख रूपए, नलजल योजनाओं की समान्य खराबी सुधारने के लिए लगभग 160 लाख रूपए, परिवहन के माध्यम से जल संकट मिटाने के लिए 75 लाख रूपए। वहीं 3 माह के लिए संधारण वाहन व्यवस्था के लिए 5.50 लाख रूपए की राशि स्वीकृत कराने का प्रस्ताव भेजा है।
ऐसा नहीं है कि लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने बुंदेलखंड पैकेज की राशि का उपयोग करने के बाद पहली वार यह राशि मांगी है। पिछले वर्षों में भी जिले में जल संकट दिखाते हुए शासन से भारी-भरकम राशि की मांग की जा चुकी है। इसके बाद भी लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग अब तक जिले को पेयजल संकट से नाम मात्र के लिए भी निजात नहीं दिला पाया है। जो विभाग की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगाता है।
पेयजल समस्या के बता रहे पुराने बहाने: यहां आपको बता दें कि जिले में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के पास 10 हजार 997 हैंडपंप हैं। वहीं बुंदेलखंड पैकेज और विभागीय स्तर पर स्थापित की गई 664 नलजल योजनाएं हैं। इन सभी हैंडपंपों और नलजल योजनाओं में से कुछ के बंद होने का कारण विभाग सामान्य खराबी, लाइन गिरना, भरेपटे होना, जलस्तर गिरना, पानी सूखना, मोटरपंप खराब होना, विद्युत आपूर्ति अवरूद्ध होना, ग्राम पंचायतों द्वार रूचि न लेना सहित अन्य कारणों को दर्शाकर लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग कागजी खानापूर्ति कर रहा है।
यही हालात बुंदेलखंड विशेष पैकेज मिलने के पहले भी दर्शाए जाते थे। पैकेज की राशि का उपयोग होने के बाद भी जिले में पहले की तरह जल संकट के हालात बने हुए हैं। वहीं विभाग स्थिति को देखते हुए फिर शासन को प्रस्ताव भेजकर मोटी रकम प्राप्त करने की कवायद में जुट गया है। इससे जिले में पेयजल संकट से कितनी राहत मिलेगी यह तो समय ही बताएगा।
