भोपाल। मध्यप्रदेश के हनी ट्रैप मामले की जांच के बीच सायबर सेल के गाजियाबाद स्थित गेस्टहाउस (फ्लैट) को खाली कराने के मामले में पुलिस के बडे अधिकारी आमने-सामने आ गए हैं। दो दिन पहले डीजीपी वीके सिंह ने गाजियाबाद में किराए पर लिए गए सायबर सेल के गेस्टहाउस को खाली करने के आदेश दिए थे। साथ ही इस संबंध में सायबर सेल के डीजी पुरुषोत्तम शर्मा से जानकारी ली। इसकी खबरें मीडिया में आने के अगले ही दिन पुरुषोत्तम शर्मा ने आईपीएस एसोसिएशन को पत्र लिख दिया और कहा – ‘इससे मेरी नहीं, बल्कि पूरे पुलिस महकमे की इमेज खराब हुई है। किसी का चरित्र हनन करना ठीक बात नहीं है। इसकी भर्त्सना की जानी चाहिए। शर्मा ने बताया कि उन्होंने मुख्यमंत्री कमलनाथ को भी पूरा मामला बता दिया है।
पुरूषोत्तम शर्मा ने आईपीएस एसोसिएशन को भेजे ई-मेल में फ्लैट खाली करवाने और इस संबंध में बयान देने के लिए डीजीपी वीके सिंह पर नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने पत्र में लिखा कि मुझे इस बात की पीडा है कि हमारे संस्कार इस हद तक नीचे आ गए कि हम किसी का चरित्र हनन करने लगें। शर्मा ने अपने पत्र में इस बात पर भी रोष जताया कि डीजीपी का बयान न केवल मीडिया में आया, बल्कि पुलिस मुख्यालय और सायबर सेल के हर कमरे में बंटवाया गया। डीजीपी ने इसका खंडन तक नहीं किया।
साइबर सेल के डीजीपी पुरुषोत्तम शर्मा ने कहा है कि जांच के लिए दिल्ली जाने वाले हेड कांस्टेबल और कांस्टेबलों के ठहरने के लिए गेस्ट हाउस के तौर पर 10 दिन पहले ही यह फ्लैट किराए पर लिया गया था। इसकी जानकारी डीजीपी को भी दी गई थी। इसे हनी ट्रैप से जोडा जाना दुर्भाग्यपूर्ण है। मैंने आईपीएस एसोसिएशन को पत्र लिखकर कहा है कि ऐसे किसी का चरित्र हनन नहीं होना चाहिए। डीजीपी के इस कृत्य की भर्त्सना की जानी चाहिए।

डीजीपी वीके सिंह ने कहा कि इस विषय पर मैं कोई कमेंट नहीं करना चाहता। लेकिन यह जरूर है कि मीडिया में प्रकाशित हुई जानकारी गलत नहीं है।

हनी ट्रैप मामले में सरकार जांच को लेकर डीजीपी वीके सिंह की कार्यप्रणाली से नाराज है। इस मामले में एसआईटी के गठन की प्रकिया से मुख्यमंत्री संतुष्ट नहीं हैं। दरअसल, पहले आईजी सीआईडी डी. श्रीनिवास वर्मा को एसआईटी चीफ बनाया गया, लेकिन 24 घंटे के अंदर ही एटीएस एडीजी संजीव शमी को इसकी कमान सौंप दी। बताया जाता है कि इसकी सूचना तक सरकार को नहीं दी गई। बाद में डीजीपी ने तर्क दिया है कि पूर्व में भी एसआईटी का गठन इसी प्रक्रिया से किया गया है। बालाघाट समेत अन्य मामलों में एसआईटी का गठन डीजीपी ने अपने स्तर पर बिना सरकार की मंजूरी के किया है।
जबकि सरकार अपने स्तर पर विचार कर रही थी कि मामले की जांच किसी अन्य एजेंसी को सौंप दी जाए, लेकिन सवाल खडे हुए कि इससे सरकार की छवि खराब होगी। मामले में पहले कमलनाथ ने गृह विभाग के प्रमुख सचिव एसएन मिश्रा से जांच के बारे में फीडबैक लिया तो उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा कि अभी तक उन्हें इस मामले में किसी ने कोई जानकारी नहीं दी है। बाद में मुख्यमंत्री ने शमी को तलब कर रिपोर्ट ली। सीएम की नाराजगी के बाद मामले में फिलहाल सभी अधिकारियों ने पूरी तरह चुप्पी साध रखी है। प्रमुख सचिव गृह एसएन मिश्रा का कहना है कि अभी इस मामले में कुछ भी कहना उचित नहीं है। जांच चल रही है। वहीं डीजीपी ने नो कमेंट्स कहकर बात करने से इनकार कर दिया है।

इंदौर के एमवायएच में मेडिकल कराने के बाद जब श्वेता विजय जैन श्वेता स्वप्निल और बरखा के साथ बाहर आई तो उनसे मीडिया ने कई सवाल पूछ लिए। इस पर श्वेता विजय ने कहा कि हमें फंसाया जा रहा है। इस मामले में कई बड़े-बडे लोग शामिल हैं, जो हमें फंसा रहे हैं। आप लोग हमारे इंसाफ के लिए कुछ करिए।
हनी ट्रैप गैंग की आरोपी आरती दयाल व छात्रा से पूछताछ के लिए पुलिस को 1 अक्टूबर और दोनों श्वेता जैन व बरखा सोनी का 30 सितंबर तक का रिमांड मिला है। शुक्रवार को पुलिस ने इंदौर कोर्ट में दलील दी कि इस केस में अब केंद्रीय विभागों के अफसरों के नाम सामने आए हैं। आशंका है कि उनके स्तर पर टेंडर किए गए। आरती और छात्रा से कुछ अहम तथ्य मिले हैं, इनका मिलान और पुष्टि करने के लिए और पूछताछ जरूरी है। पुलिस ने कहा कि आरती ने बीमारी का बहाना बनाकर पूछताछ में सहयोग नहीं किया। अब भी उससे कई बिंदुओं पर जानकारी लेना है, लिहाजा 2 अक्टूबर तक का रिमांड मिलना चाहिए।
भाजपा के वरिष्ठ विधायक व नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने हनी ट्रैप मामले की सीबीआई से जांच कराने की बात कही है। उन्होंने कहा कि राजस्थान, छत्तीसगढ़ से भी इसके तार जुड़े होने की खबरें हैं, ऐसे में मप्र की एसआईटी काम नहीं कर पाएगी। इसीलिए इस मामले को सीबीआई को दे देना चाहिए।

सामान्य प्रशासन मंत्री डॉ. गोविंद सिंह ने हनी ट्रैप मामले में कहा है कि मैं कोई जादूगर नहीं हूं। कोई भी नेता हो या नेता का चाचा हो, किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। चाहे वह किसी जाति धर्म या दल का हो। जनता की सेवा के लिए अधिकारियों को चुना गया है। इस तरह के काम करने पर नाम सार्वजनिक कर सबके सामने लाए जाएं, ताकि फिर कोई ऐसा करने से पहले सोचे।

हनी टैªप मामला मामूली नहीं है इसमें बडे राजनेताओं, अधिकरीऔर बडे कारोवारी शामिल है। लडकियों ने अपना जिस्म दिखाकर उन लोगों को ठगा उनकी गलती है। गर्म जिस्म के शौकीन घर के बाहर होटलों में 18-20 साल की लडकियों के साथ रातें गुजारने वाले अधिकारी और नेता दोषी नहीं है। जब लडकियों के नाम सार्वजनिक कर दिए फिर नेताओं व अधिकारियों के नाम जग जाहिर करने में क्या परेशानी आ रही है। जांच के नाम पर मामला बंद करने की योजना है। हनी टैªप मामला उजागर हो या न हो लेकिन अधिकारियों में शीतयुद्ध शुरु हो गया है। इस शीतयुद्ध पर सरकार भ्ज्ञी रोक नहीं लगा पा रही है।

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