ग्वालियर। कांग्रेस सांसद और पूर्व केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा है कि राजपूत समाज बेटियों को पढ़ाने में कोताही न बरते, क्योंकि बदलते परिवेश में हर परिवार का शिक्षित होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि विश्वभर में संस्कृति व संस्कारों में बदलाव आ रहा है और राजपूत समाज ने आज भी संस्कृति व संस्कारों की नींव को मजबूत बनाकर रखा है। सिंधिया शुक्रवार को चेम्बर ऑफ कॉमर्स के सभागार में राजपूत समाज के प्रतिभाशाली व्यक्तियों के सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि की आसंदी से बोल रहे थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता संतकृपाल सिंह ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में डीआईजी एसएएफ योगेन्द्र सिंह सिकरवार, विक्रम विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. आरकेएस चौहान, जीवाजी विश्वविद्यालय के प्रो. एपीएस चौहान, सेवानिवृत्त कर्नल डीपीएस भदौरिया एवं साहित्यकार व समाजसेवी श्रीमती पुष्पा सिसोदिया मंचासीन रहे। संचालन एडीशनल एसपी देवेन्द्र सिंह चौहान ने एवं आभार भक्तप्रकाश ने व्यक्त किया। राजपूत समाज के भव्य स मान समारोह में मुख्य अतिथि सिंधिया ने कहा कि राजपूत समाज वीरता व सत्यता का परिचायक है। इस समाज में छल-कपट का कोई स्थान नहीं है। राजपूत समाज ने हमेशा सर्वहारा वर्ग के उत्थान व रक्षा के लिए कार्य किया है और भारत को एक गुलदस्ते के रूप में संजोकर रखते हुए अपने साफे की आन, बान व शान को बनाए रखते हुए सभी समाज को साथ लेकर सक्षम भारत के नव निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। समाज में, राजनीति में, राजनीति में महिलाओं को आगे बढ़ाने का जिक्र करते हुए सिंधिया ने कहा कि महिलाओं की वीरगाथा किसी से कम नहीं है, जब वे घर चला सकती हैं तो देश व प्रदेश भी चला सकती हैं। इसलिए महिलाओं की भागीदारी पचास फीसदी होना चाहिए। श्री सिंधिया ने नौजवानों का आव्हान किया कि वे इस दौर में पनप रहे असहिष्णुता को खत्म करने के लिए समाज में अच्छे कार्यों के लिए अपनी भागीदारी बढ़ाएं। उन्होंने सम्मानित हुए व्यक्तियों को बधाई दी।
