नई दिल्ली। भारतीय मूल की 19 वर्षीय हेली पिसाडी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए मिस इंडिया वर्ल्डवाइड 2026 का खिताब अपने नाम कर लिया है। त्रिनिदाद और टोबैगो का प्रतिनिधित्व करने वाली हेली ने दुनिया के अलग अलग देशों से पहुंची भारतीय मूल की प्रतिभागियों को पीछे छोड़ते हुए यह प्रतिष्ठित ताज हासिल किया। हेली फिलहाल कानून की पढ़ाई कर रही हैं और इतनी कम उम्र में मिली इस सफलता ने उन्हें भारतीय प्रवासी समुदाय के बीच चर्चा का प्रमुख चेहरा बना दिया है। यह प्रतियोगिता भारत के बाहर आयोजित होने वाली सबसे लंबे समय से चल रही भारतीय सौंदर्य प्रतियोगिताओं में शामिल है और इस वर्ष इसका 33वां संस्करण आयोजित किया गया।

मिस इंडिया वर्ल्डवाइड 2026 का आयोजन त्रिनिदाद और टोबैगो के नेशनल एकेडमी फॉर द परफॉर्मिंग आर्ट्स में किया गया। इसी कार्यक्रम के दौरान वर्ल्डवाइड पेजेंट्स की को चेयरपर्सन नीलम सरन ने हेली पिसाडी को मिस इंडिया वर्ल्डवाइड का ताज पहनाया। जीत के बाद हेली को ताज और सैश के साथ देखा गया। उनकी इस उपलब्धि को भारतीय मूल के लोगों के लिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि प्रतियोगिता भारतीय संस्कृति और विरासत से जुड़े प्रतिभागियों को वैश्विक मंच प्रदान करती है।
हेली पिसाडी की खासियत केवल उनकी खूबसूरती नहीं बल्कि उनकी शिक्षा और आत्मविश्वास भी है। वह कानून की पढ़ाई कर रही हैं और पढ़ाई के साथ उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सौंदर्य प्रतियोगिता में हिस्सा लेकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। त्रिनिदाद और टोबैगो जैसे देश से भारतीय मूल की प्रतिनिधि के तौर पर इस मंच पर पहुंचना भी अपने आप में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। प्रतियोगिता में अलग अलग देशों में रहने वाली भारतीय मूल की महिलाओं ने हिस्सा लिया और अपनी प्रतिभा तथा व्यक्तित्व का प्रदर्शन किया।
इस आयोजन में केवल मिस इंडिया वर्ल्डवाइड का खिताब ही नहीं दिया गया बल्कि दो अन्य प्रमुख श्रेणियों में भी विजेताओं का चयन हुआ। अमेरिका का प्रतिनिधित्व करने वाली डॉ. श्रीदेवी मंगिनानी ने मिसेज इंडिया वर्ल्डवाइड 2026 का खिताब अपने नाम किया। वहीं नीदरलैंड्स की लूना जयराम मिस टीन इंडिया वर्ल्डवाइड 2026 चुनी गईं। इस तरह तीन अलग अलग देशों की भारतीय मूल की महिलाओं ने प्रतियोगिता के तीन प्रमुख खिताब अपने नाम किए।
मिस इंडिया वर्ल्डवाइड प्रतियोगिता की शुरुआत तीन दशक से भी अधिक समय पहले हुई थी। इसका उद्देश्य दुनिया के अलग अलग हिस्सों में रहने वाले भारतीय मूल के लोगों को अपनी संस्कृति और पहचान से जोड़ना भी है। समय के साथ यह प्रतियोगिता भारतीय प्रवासी समुदाय के लिए एक अंतरराष्ट्रीय मंच के रूप में अपनी पहचान बना चुकी है। प्रतियोगिता में शामिल होने वाली प्रतिभागियां अपनी भारतीय विरासत के साथ उस देश का भी प्रतिनिधित्व करती हैं जहां वे रहती हैं। हेली पिसाडी की जीत इसी वैश्विक भारतीय समुदाय की बढ़ती पहचान को दर्शाती है। त्रिनिदाद और टोबैगो में आयोजित इस आयोजन ने भारतीय मूल की प्रतिभाओं को एक मंच पर लाने का काम किया। 19 साल की हेली के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि वह अभी कानून की पढ़ाई कर रही हैं और शिक्षा के साथ उन्होंने सौंदर्य प्रतियोगिता में अंतरराष्ट्रीय सफलता हासिल की है। उनकी जीत ने भारतीय मूल की युवा प्रतिभाओं के लिए एक नई मिसाल कायम की है।
