विधानसभा में फ्लोर टेस्ट के दौरान सरकार गिराने का बार बार दावा करने वाली बीजेपी को बड़ा झटका लगा है। इस सियासी ड्रामे के बाद भोपाल से लेकर दिल्ली तक खलबली मच गई है। हाईकमान ने प्रदेश संगठन से नाराज होकर रिपोर्ट मांगी है। संगठन मंत्री सुहास भगत से शिवराज सिंह चौहान और प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह को तलब किया है।

वही पार्टी ने विधायकों पर कार्रवाई करने से मना कर दिया है। पार्टी का मानना है कि जब भाजपा विधायक दल विधेयक पर वोटिंग नहीं चाहता था तो उसे बहिर्गमन करना चाहिए था। नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव यदि बहिर्गमन का फैसला कर लेते तो भाजपा को किरकिरी का सामना नहीं करना पड़ता। पार्टी ने यह भी साफ कर दिया कि भाजपा ही विधेयक के समर्थन में थी तो इसमें कांग्रेस की जीत कैसी। किसी विधेयक का समर्थन करने से कोई विधायक कांग्रेस का सदस्य नहीं बन गया, इसलिए उनके खिलाफ कार्रवाई का सवाल ही नहीं है।

हाईकमान की नाराजगी के बाद संसद सत्र छोड़कर राकेश सिंह ने बुधवार रात भोपाल आकर पार्टी नेताओं पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव, पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा, विश्वास सारंग सहित अन्य नेताओं के साथ बातचीत की। इस दौरान सबसे अहम मुद्दा कांग्रेस के समर्थन में गए दो विधायक नारायण त्रिपाठी और शरद कोल का रहा। पार्टी नेताओं ने कहा कि नाराज विधायकों को मनाया जाए और उनकी नाराजगी दूर की जाए। उनके खिलाफ कार्रवाई के सवाल पर नेताओं ने कहा कि उन्होंने पार्टी व्हिप का उल्लंघन नहीं किया है, इसलिए कार्रवाई का सवाल नहीं।वही आगे की रणनीति पर मंथन किया गया।

इसके साथ ही विधानसभा में विधायकों की गैर मौजूदगी पर सवाल खड़े किए हैं। विधानसभा की कार्यवाही के दौरान बीजेपी के 22 विधायकों के सदन से नदारद रहने पर हाईकमान ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा है कि विधानसभा की कार्यवाही के दौरान विधायकों को सदन में मौजूद रहने के लिए व्हिप जारी क्यों नहीं किया गया था।

वही भाजपा ने भार्गव के 24 घंटे में कमलनाथ सरकार गिरा देंगे से किनारा किया है।पार्टी का कहना है कि वरिष्ठ नेताओं का इससे कोई लेना-देना नहीं है। ये उनका अपना बयान है। ये बयान उन्होंने क्यों और कैसे किन हालात में दिया, पता नहीं।हालांकि माना जा रहा है कि इस बयान के बाद भार्गव की मुश्किलें बढ सकती है। इसके पहले भी भार्गव पार्टी को नाराज कर चुके है।वही बीजेपी विधायकों ने भी नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्वग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि नेता प्रतिपक्ष विधायकों की कोई बात नहीं सुनते हैं।

गौरतलब है कि मध्‍यप्रदेश विधानसभा में बुधवार को दंड संशोधन विधेयक पर वोटिंग में इसमें कांग्रेस को बहुमत मिला। जबकि भाजपा को झटका लगा। कांग्रेस को 122 वोट मिले। जानकारी के अनुसार इस दौरान भाजपा के दो विधायकों ने क्राॅस वोटिंग की। इसमें मैहर से विधायक नारायण त्रिपाठी और दूसरे शरद कोल हैं, जो ब्यौहारी से विधायक हैं। वाेटिंग के बाद सदन की कार्रवाई अनिश्चितकाल के लिए स्‍थगित कर दी गई। इस पूरे घटनाक्रम के बाद राजनैतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। कर्नाटक की जीत के बाद एमपी में यह बीजेपी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

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