ग्वालियर। मध्यप्रदेश के चंबल संभाग के भिण्ड जिले की 10 परियोजनाओं में से दो भिण्ड और अटेर में पोषण वितरण में गडबडी पकडे जाने के बाद महिला एवं बाल विकास संचालनालय से एक विशेष टीम बनाई गई है, जिसमें उपसंचालक सीमा शर्मा, दीपक संकत और लेखाधिकारी विनोद युरकरे को शामिल किया गया है। इस संबंध में 29 अगस्त को आदेश जारी हो गए हैं। यह टीम जल्द ही भिण्ड, अटेर के साथ शेष बरोही, गोहद, गोरमी, लहार, मिहोना, मेहगांव और मौ में पोषण आहार वितरण मामले की गोपनीय जांच करेगी।
भिण्ड ग्रामीण परियोजना में पोषण आहार घोटाला खुलने के बाद अटेर परियोजना के गोदाम में भी पोषण आहार की 242 बोरियां कम पाई गईं थी। इसके बाद विभाग के संयुक्त संचालक डीके सिद्धार्थ ने भी मामले की जांच की। यहां के भी गोदाम प्रभारी एवं डाटा एंट्री ऑपरेटर अरविंद सिंह भदौरिया और भृत्य अजय पाल सिंह चौहान को निलंबित कर दिया गया था। साथ ही भिण्ड जिले के अटेर महिला बाल विकास के परियोजना अधिकारी (सीडीपीओ) राहुल गुप्ता के निलंबन के लिए प्रस्ताव कलेक्टर की ओर से आयुक्त महिला एवं बाल विकास विभाग को भेजा गया था लेकिन करीब दो सप्ताह बाद भी यह प्रस्ताव अटका हुआ है।
जुलाई महीने के अंतिम दिनों में भिण्ड ग्रामीण परियोजना का पोषण आहार एक आटा चक्की पर बिकता हुआ भिण्ड के अनुविभागीय अधिकारी राजस्व (एसडीएम) और महिला एवं बाल विकास अधिकारी अब्दुल गफ्फार ने पकड़ा था। यह मामला खुलते ही कलेक्टर छोटे सिंह ने भिण्ड ग्रामीण परियोजना के गोदाम प्रभारी सुनील गोयल और पोषण आहार बेचने के लिए ले जाने वाले भृत्य नारायण अटल को निलंबित कर दिया था। साथ ही इनके विरुद्ध देहात थाना में एफआईआर भी दर्ज कराई थी। इसी मामले में महिला एवं बाल विकास विभाग के आयुक्त ने तत्कालीन परियोजना अधिकारी निशा शंखवार को भी निलंबित कर दिया था।
भिण्ड कलेक्टर छोटे सिंह ने आज यहां बताया कि आंगनबाडी केन्द्रों पर बांटे जाने वाले पोषण आहार में घोटाले की जांच रिपोर्ट 10 दिन में मांगी गई थी। एक माह से ज्यादा समय हो जाने के बाद भी जांच रिपोर्ट नहीं मिलने के कारण भिण्ड शहरी गाल विकास अधिकारी कौशलेन्द्र मावई को फील्ड से हटाकर ऑफिस अटैच कर दिया गया है। अब नए सिरे से जांच कराई जा रही है।

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