दतिया। मध्यप्रदेश के दतिया मेडिकल कॉलेज में पदस्थ कई डॉक्टर उत्तरप्रदेश में प्राइवेट क्लीनिक संचालित कर रहे हैं। उन्हें किसी प्रकार की समस्या न आए, इसलिए उन्होंने अब तक मध्यप्रदेश मेडिकल काउंसिल में रजिस्ट्रेशन नहीं कराया। नियमानुसार मध्यप्रदेश में सरकारी या प्राइवेट अस्पतालों में प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टरों के लिए मध्यप्रदेश मेडिकल काउंसिल में रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य है। प्राइवेट क्लीनिक के चक्कर में मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर ओपीडी में भी मरीजों का इलाज नहीं कर रहे हैं।
मेडिकल कॉलेज में पदस्थ सर्जरी विभाग के एचओडी डॉ. केएन आर्या, ऑर्थोपेडिक्स विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मयंक अग्रवाल, मेडिसिन विभाग के असिस्टेंट पद पर डॉक्टर आशीष शर्मा उत्तरप्रदेश में अपने क्लीनिक संचालित करते हैं। ओपीडी के समय ही यह डॉक्टर झांसी चले जाते हैं और वहां मरीजों का इलाज करते हैं। डॉ. मयंक बंसल झांसी में हॉस्पिटल रोड पर चार मंजिला अस्पताल तैयार करा रहे हैं।
प्राइवेट क्लीनिक संचालित करने या सरकारी अस्पताल में नौकरी करने के लिए संबंधित स्टेट में रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होता है लेकिन यह डॉक्टर मध्यप्रदेश मेडिकल काउंसिल में रजिस्ट्रेशन कराए बिना ही दतिया मेडिकल कॉलेज में नौकरी कर रहे है ताकि यहां नौकरी करने के साथ-साथ उत्तरप्रदेश के रजिस्ट्रेशन के आधार पर झांसी में क्लीनिक व अस्पताल संचालित कर सकें।
मध्यप्रदेश में अस्पताल संचालित करने या सरकारी नौकरी के लिए मध्यप्रदेश मेडिकल काउंसिल का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है। मध्यप्रदेश मेडिकल काउंसिल में ऑनलाइन प्रोविजनल एवं रेसिप्रोकल रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन करते वक्त संबंधित स्टेट मेडिकल काउंसिल का अनापत्ति प्रमाण पत्र अपलोड करना अनिवार्य है। डॉक्टर उत्तरप्रदेश मेडिकल काउंसिल से अनापत्ति लेना नहीं चाहते। ऐसे में कई साल नौकरी करने के बाद भी रजिस्ट्रेशन नहीं कराया है।
मध्यप्रदेश मेडिकल काउंसिल के रजिस्ट्रेशन जमा करने के लिए मेडिकल कॉलेज में आदेश जारी किए जाते हैं। हाल में 14 दिन पहले 9 सितंबर को डीन ने आदेश जारी किया जिसमें स्पष्ट है कि जिन डॉक्टरों ने मध्यप्रदेश मेडिकल काउंसिल में रजिस्ट्रेशन नहीं कराया है, वे 15 दिन में रजिस्ट्रेशन की सत्यापित प्रतिलिपि कार्यालय में जमा कराएं लेकिन अब तक इन डॉक्टरों ने रजिस्ट्रेशन की सत्यापित प्रतिलिपि जमा नहीं कराई है।
