भोपाल। मध्यप्रदेश में महापौर और नगरीय निकायों के अध्यक्ष का चुनाव अप्रत्यक्ष तरीके से होगा। राज्यपाल लालजी टंडन ने राज्य सरकार के नगरीय निकाय अध्यादेश को मंजूरी दे दी। इसके तहत अब महापौर और अध्यक्ष का चुनाव पार्षद कर सकेंगे। राज्यपाल ने परिसीमन के बाद चुनाव के लिए मिलने वाले छह महीने के समय को घटाकर दो महीने कर दिया। इससे प्रशासन को दावे-आपत्ति के लिए भी कम समय मिलेगा।

माना जा रहा है कि राज्यपाल ने ये निर्णय सोमवार को मुख्यमंत्री कमलनाथ से मिलने के बाद लिया है। सोमवार को कमलनाथ ने राज्यपाल से मिलकर नगर निगम पालिक विधि संशोधन अध्यादेश 2019 के बारे में विस्तार से चर्चा की थी। हालांकि उसके पहले पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने भी राज्यपाल से मुलाकात की थी।
कमलनाथ ने अध्यादेश पर हो रही चर्चा पर कहा, जिन लोगों ने राजभवन की गरिमा के खिलाफ सार्वजनिक बयान देकर राज्यपाल पर दबाव बनाने का प्रयास किया है वह उनके निजी विचार हैं। सरकार का उनसे कोई लेना देना नहीं है। लोकतंत्र में स्वस्थ मर्यादाओं का पालन जरूरी है।

राजभवन से जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि राज्यपाल टंडन मानते हैं कि संवैधानिक पदों के विवेकाधिकार पर टीका टिप्पणी करना संवैधानिक मर्यादाओं का उल्लंघन है। राज्यपाल पद की गरिमा निष्पक्ष और निर्विवादित है। इस पर किसी भी प्रकार का प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष दबाव बनाना संवैधानिक मर्यादाओं का उल्लंघन है। स्वस्थ लोकतांत्रिक परम्पराओं के लिए हानिकारक है।

दरअसल, कांग्रेस सांसद विवेक तन्खा के ट्वीट के बाद राज्यपाल सरकार से खफा बताए जा रहे थे, जिसमें उन्होंने राज्यपाल को सलाह दी थी कि सरकार की अनुशंसा पर राज्यपाल फैसला करें। राज्यपाल की नाराजगी दूर करने के लिए मुख्यमंत्री कमलनाथ ने उनसे मुलाकात की थी। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने विवेक तन्खा के उस बयान को भी उनकी निजी राय बताया था।

राज्यपाल के अध्यादेश को मंजूरी दिए जाने के बाद नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने कहा राज्यपाल का फैसला सर्वमान्य है। लेकिन पार्षदों की खरीद-फरोख्त रोकने के लिए सरकार को नगरीय निकायों में भी दल बदल कानून लागू करना चाहिए. इसके लिए भी सरकार अध्यादेश लाए।

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