भोपाल। मध्यप्रदेश के भोपाल में फैमिली कोर्ट में एक ऐसा मामला पहुंचा है जिसमें पति को शादी के आठ साल बाद पता चला कि पहला बेटा उसकी संतान नही है। जब पति ने इस मामले में पत्नी से बात की तो उसने पति पर ही प्रताड़ना का आरोप लगाकर थाने में शिकायत कर दी। पति ने डीएनए टेस्ट कराया तो साबित हो गया कि बच्चा उसका नहीं है।

पति ने फैमिली कोर्ट को बताया कि वह पत्नी को भरण-पोषण के साथ बच्चे के भविष्य को देखते हुए उसे पिता का नाम भी देने को तैयार है, लेकिन पत्नी के साथ रहने को तैयार नहीं है। फैमिली कोर्ट के आदेश पर काउंसलर नुरुनिसा खान ने जब काउंसलिंग की तो पता चला कि पति इस बात से ज्यादा आहत नहीं है कि पहला बच्चा उसका नहीं है बल्कि वह इस बात से नाराज है कि पत्नी ने गलती करने बाद उस पर झूठे आरोप लगाए हैं।

काउंसलर को महिला के पति ने बताया मेरी शादी नवंबर 2011 में हुई थी। अगले साल मैं एक बच्चे का पिता बन गया। तीन साल बाद दूसरा बच्चा हुआ। एक दिन पत्नी किसी से कह रही थी बच्चा तुम्हारा है कैसे साबित करोगे। यह बात बहन ने सुन ली। पता चलने पर मैंने पत्नी से बात की। वह मुकर गई। शक के कारण झगडे होने लगे। पत्नी ने थाने पहुंचकर मेरे और परिजनों के खिलाफ शिकायत कर दी। इसके बाद मैंने डीएनए टेस्ट कराया, जिसमें बड़े बेटे का डीएनए मैच नहीं हुआ। हम एक साल से अलग रह रहे हैं। बच्चे दोनों के पास आते-जाते हैं। मैं बड़े बेटे को उतना ही प्यार करता हूं जितना पहले करता था। बस पत्नी के साथ नहीं रह सकता।

काउंसलर को महिला ने बताया मैं मानती हूं, मुझसे गलती हुई है। पति से कई बार माफी मांग चुकी हूं। मैं प्यार में बहक गई थी। जब पहले प्यार ने ब्लैकमेल करने की कोशिश की तब उसे समझा रही थी तभी ननद ने यह बात सुन ली और बबाल हो गया। चूंकि गलती मेरी थी इसलिए चुप रही। एक दिन पति ने मुझे छुरी मारी जिसकी शिकायत मैंने थाने में की। मैं पति को नहीं छोड़ सकती। इसलिए तलाक नहीं दूंगी।

काउंसलर फैमिली कोर्ट नुुरुनिसा खान ने बताया कि उम्मीद है कि दो तीन काउंसलिंग के बाद परिवार बिखरने से बच जाएगा। इसलिए कोर्ट को भेजी रिपोर्ट में दूसरी काउंसलिंग कराने को लिखा है। दूसरी काउंसलिंग के लिए नवंबर की तारीख दी है।

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