नई दिल्ली: चक्रवात अर्नब ने आंध्र प्रदेश में भारी तबाही मचाई है. राज्य में तेज हवाओं और भारी बारिश के कारण कई जगह पेड़ और बिजली के खंभे उखड़ गए, सड़कें क्षतिग्रस्त हो गईं और बिजली आपूर्ति बाधित हो गई. NDRF के मुताबिक, चक्रवात के कारण आंध्र प्रदेश में तीन लोगों की मौत हुई है, 31 मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं. वहीं, एहतियात के तौर पर करीब 57 हजार लोगों को राहत शिविरों में पहुंचाया गया है. हालांकि, तट पार करने के बाद चक्रवात कमजोर पड़ गया है, लेकिन कई इलाकों में बारिश जारी रहने की आशंका है.
आंध्र प्रदेश और यनम के तट से गुजरा चक्रवात
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, चक्रवात अर्नब मंगलवार देर रात से बुधवार सुबह के बीच आंध्र प्रदेश और पुडुचेरी के यनम क्षेत्र के तट से गुजरा. इसके बाद यह कमजोर होकर अत्यंत भीषण चक्रवाती तूफान से भीषण चक्रवाती तूफान में बदल गया. मौसम विभाग के मुताबिक, चक्रवात का केंद्र यनम के दक्षिण-पश्चिम में था. यह नरसापुर से करीब 20 किलोमीटर पूर्व-उत्तर पूर्व, यनम से 40 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम और काकीनाडा से लगभग 60 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में तट पार कर गया. अनुमान है कि चक्रवात धीरे-धीरे कमजोर होकर पहले चक्रवाती तूफान और फिर गहरे दबाव के क्षेत्र में बदल जाएगा. हालांकि, इसके प्रभाव से आंध्र प्रदेश और ओडिशा के कुछ हिस्सों में बारिश जारी रह सकती है.
आंध्र प्रदेश में 3 लोगों की मौत
NDRF के महानिरीक्षक नरेंद्र सिंह बुंदेला ने बताया कि चक्रवात से आंध्र प्रदेश सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है. राज्य में तीन लोगों की मौत होने की जानकारी मिली है. वहीं, कई इलाकों में पेड़ उखड़ गए और 31 मकानों को नुकसान पहुंचा है. आंध्र प्रदेश में करंट लगने से दो लोगों की मौत की जानकारी भी सामने आई है. विशाखापत्तनम जिले में मंगलवार रात 53 वर्षीय एक व्यक्ति खेत में पानी निकालने के लिए बनी नाली के पास टूटकर गिरे बिजली के तार की चपेट में आ गया. इससे उसकी मौत हो गई. वहीं, अनकापल्ली जिले के येल्लमंचिली शहर में बुधवार सुबह 55 वर्षीय एक महिला की करंट लगने से मौत हो गई. बताया गया कि घर के बाहर पड़े बिजली के खुले तार पर गलती से पैर पड़ने के कारण यह हादसा हुआ. NDRF की शुरुआती जानकारी में राज्य में तीन मौतों की बात कही गई है, जबकि आंध्र प्रदेश से आई एक विस्तृत रिपोर्ट में करंट लगने से दो मौतों का उल्लेख है.
कई जिलों में उखड़े पेड़, बिजली आपूर्ति ठप
चक्रवात के कारण आंध्र प्रदेश के तटीय जिलों में सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है. तेज हवाओं की वजह से कई जगह पेड़ और बिजली के खंभे उखड़ गए. इससे सड़कों पर यातायात बाधित हुआ और कई इलाकों में बिजली आपूर्ति ठप हो गई. काकीनाडा जिले के पुलिस अधीक्षक जी. बिंदु माधव के मुताबिक, जिले में बिजली के करीब 100 खंभे और कई पेड़ गिर गए. तेज हवाओं के कारण समुद्र तट के किनारे बनी उप्पाडा सड़क भी पूरी तरह बह गई. उन्होंने बताया कि जिले में बारिश कम होने के बावजूद तेज हवाओं से काफी नुकसान हुआ.
विशाखापत्तनम जिले में करीब 400 पेड़ गिरने की जानकारी सामने आई है. सड़क एवं भवन विभाग और ग्रेटर विशाखापत्तनम नगर निगम की टीमें सड़कों से पेड़ हटाने में जुटी हैं. अधिकारियों के मुताबिक, ज्यादातर सड़कों पर यातायात बहाल कर दिया गया है, जबकि बाकी जगहों पर सफाई का काम जारी है. कोनासीमा जिले में भी तेज हवाओं से कई पेड़ और बिजली के खंभे गिर गए. अधिकारियों ने बताया कि बिजली आपूर्ति बहाल करने और प्रमुख राजमार्गों पर यातायात सुचारू करने के लिए टीमें लगाई गई हैं.
कई जगह 200 मिमी से ज्यादा बारिश
चक्रवात के प्रभाव से आंध्र प्रदेश के कई जिलों में भारी बारिश हुई. मौसम विभाग के अनुसार, अनकापल्ली, विजयनगरम और विशाखापत्तनम जिलों के कुछ इलाकों में 200 मिलीमीटर से ज्यादा बारिश दर्ज की गई. अनकापल्ली के कन्नूरीपालेम में सबसे अधिक 261.5 मिलीमीटर बारिश हुई. विजयनगरम जिले के केवीबीआर स्कूल क्षेत्र में 259.74 मिलीमीटर और विशाखापत्तनम के 16वीं पुलिस बटालियन क्षेत्र में 259.06 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई. अल्लूरी सीतारामराजू जिले में लगातार बारिश के कारण जलस्तर बढ़ने की आशंका जताई गई है. यहां अनंतगिरि मंडल के ताडीगुडा गांव में एक पुराना पुल बह गया, जिससे एक बस्ती का संपर्क दूसरे इलाकों से कट गया. अधिकारियों ने बताया कि संपर्क बहाल करने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था और मरम्मत का काम किया जा रहा है.
57 हजार लोगों को राहत शिविरों में पहुंचाया
चक्रवात से संभावित खतरे को देखते हुए प्रशासन ने बड़े स्तर पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया. NDRF के महानिरीक्षक नरेंद्र सिंह बुंदेला ने बताया कि आंध्र प्रदेश में करीब 57 हजार लोगों को राहत शिविरों में पहुंचाया गया. वहीं, मंगलवार रात यनम से 38 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया. कोनासीमा जिले में निचले इलाकों से 10 हजार से अधिक लोगों को निकालने की जानकारी दी गई है. जिले में करीब 495 चक्रवात राहत शिविर और अस्थायी राहत केंद्र बनाए गए हैं. विशाखापत्तनम में भी कुछ परिवार राहत केंद्रों में रह रहे हैं, जबकि कई लोग हालात सामान्य होने पर अपने घर लौट गए. केंद्र सरकार के साथ आंध्र प्रदेश और ओडिशा की राहत एवं बचाव टीमें लगातार काम कर रही हैं. आंध्र प्रदेश के अलावा छत्तीसगढ़, झारखंड, तेलंगाना, पुडुचेरी और अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह में NDRF की कुल 39 टीमें तैनात की गई हैं. मंगलवार रात आंध्र प्रदेश में चार अतिरिक्त टीमें भी भेजी गईं.
मुख्यमंत्री ने 2 घंटे में सड़कें साफ करने के दिए निर्देश
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने बुधवार सुबह अधिकारियों के साथ बैठक कर चक्रवात से हुए नुकसान और राहत कार्यों की समीक्षा की. उन्होंने अधिकारियों को प्रभावित इलाकों में जल्द से जल्द सामान्य स्थिति बहाल करने के निर्देश दिए. मुख्यमंत्री ने गिरे हुए पेड़ों के कारण बंद सड़कों को दो घंटे के भीतर साफ करने और राष्ट्रीय राजमार्गों पर यातायात रोक रहे पेड़ों को तुरंत हटाने को कहा. उन्होंने तेज हवाएं थमने के बाद बिजली आपूर्ति बहाल करने पर भी जोर दिया.
एन. चंद्रबाबू नायडू ने राहत शिविरों में भोजन, पेयजल और चिकित्सा सुविधाओं की पर्याप्त व्यवस्था करने के निर्देश दिए. साथ ही खेतों में पानी भरने से रोकने, बागवानी फसलों को बचाने और तालाबों व नहरों के तटबंधों को टूटने से बचाने के लिए जरूरी कदम उठाने को कहा. मुख्यमंत्री ने फसलों के नुकसान का शुरुआती आकलन तैयार करने और NDRF-SDRF को किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने का निर्देश दिया है.
ओडिशा में बड़े नुकसान की खबर नहीं
NDRF के महानिरीक्षक के मुताबिक, चक्रवात का असर आंध्र प्रदेश के उत्तरी हिस्से और ओडिशा के दक्षिणी हिस्से में अधिक देखा गया है. दोनों राज्यों के कुछ जिलों में तेज हवाओं के साथ बारिश हुई है. हालांकि, शुरुआती रिपोर्ट में ओडिशा में किसी बड़े नुकसान की जानकारी नहीं मिली है. राज्य सरकार के अधिकारियों के अनुसार, चक्रवात के प्रभाव से बुधवार और बृहस्पतिवार को भी आंध्र प्रदेश के कई हिस्सों में भारी बारिश हो सकती है. ऐसे में प्रशासन को सतर्क रहने और राहत एवं बचाव कार्य जारी रखने के निर्देश दिए गए हैं.
