इंदौर। शहरभर में किन्नरों द्वारा की जाने वाली मनमानी, अवैध वसूली और दादागीरी से रहवासियों के साथ-साथ दुकानदार-व्यापारी भी लगातार परेशान रहते आए हैं। अभी तक शासन-प्रशासन और पुलिस इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर पाया है। कुछ समय पूर्व महालक्ष्मी नगर, तुलसी नगर के रहवासियों ने किन्नरों के साथ बैठक कर नेग की राशि तय भी की थी।
प्रमुख त्योहारों से लेकर शादी, बच्चे के जन्म सहित अन्य अवसरों पर किन्नरों द्वारा घर पहुंचकर मनमानी राशि मांगी जाती है और यही स्थिति शहरभर के व्यापारिक क्षेत्रों की है। अभी राजबाड़ा क्षेत्र के इंदौर रिटेल गारमेंट एसोसिएशन ने इसे लेकर पहल की। एसोसिएशन के अध्यक्ष अक्षय जैन के मुताबिक गत वर्ष भी नंदलालपुरा के दोनों किन्नरों समूहों और एसोसिएशन के बीच आपसी सहमति बनी थी, जिसमें रक्षाबंधन, होली-दीपावली पर प्रति दुकान 200 और 500 रुपए की राशि तय की गई थी। किन्नर समुदाय ने भी इस निर्धारित राशि को स्वीकार करते हुए परंपरानुसार दुकानदारों को आशीर्वाद देकर शांतिपूर्वक रवाना होने की बात कही। एसोसिएशन ने राजबाड़ा के साथ-साथ शहर के सभी व्यापारी बंधुओं से अपील की है कि वे किन्नर समुदाय के साथ पूर्व में हुए आपसी समन्वय का सम्मान करते हुए रक्षाबंधन और होली पर प्रति दुकान 200 रुपए तथा दीपावली पर 500 रुपए की निर्धारित नेग राशि ही प्रदान करें, जिससे बाजारों में भी सौहार्दपूर्ण और शांतिपूर्ण वातावरण निर्मित रहे। किसी भी प्रकार का विवाद या अप्रिय स्थिति न बने, इसके लिए दोनों ही पक्ष इस समन्वय का पालन करें। हालांकि यह भी देखने-सुनने में आता है कि इस तरह के निर्णय के बावजूद किन्नरों द्वारा मनमानी राशि की मांग की जाती है। दरअसल बड़ी संख्या में नकली किन्नर भी इस तरह की वसूली में सक्रिय रहते हैं और आए दिन विवाद की जानकारी भी सामने आती है। हजारों-लाखों रुपए की राशि तक इन किन्नरों द्वारा कई शुभ अवसरों पर आकर मांगी जाती है और न देने पर हंगामा करते हैं।
