ग्वालियर। हम सभी मानस का गायन करते हैं, लेकिन ब्रह्मांड में निरंतर गायन करने वाले प्रमुख रूप से सात व्यक्ति हैं। इनमें सबसे प्रमुख मातृ शक्ति है। सबसे पहले वीणा वादिनी मां सरस्वती है, इसके बाद शेषनाग, ब्रह्मा महेश हैं। यह बात चित्रकूट धाम फूलबाग मैदान में आज रविवार सुबह श्रीराम कथा का रसपान कराते हुये संत मोरारी बापू ने कही।
कथा को आगे बढ़ाते हुये उन्होंने कहा कि मां से बड़ा ज्ञानी कोई नहीं है। मां बच्चों को लोरी गाकर सुलाती है। इसलिए मां से बड़ा गायक कोई नहीं हो सकता। वीणा वादिनी, सरस्वती ने सबसे पहले तान छेड़ी है। उन्होंने कहा कि आज पहला नाम ब्रह्मलोक में सरस्वती का है तो दूसरा पाताल लोक में शेषनाग का, तीसरा नाम महेश का है जो पृथ्वीलोक में है। उन्होंने कहा कि भगवान शिव को हम कई नामों से जानते हैं। तुलसीदास ने श्रीराम कथा में मातृ महेश शब्द 48 बार लिखा है। उन्होंने कहा कि बुद्ध पुरुष के दर्शन करने से ही हमारे पाप धुल जाते हैं। पापों का सामना बुद्ध पुरुष करते हैं और वह नैतिकता की शिक्षा देते हुये सदमार्ग दिखाते हैं। उन्होंने कहा कि आज हमारे यहां चरण स्पर्श की महिमा है। बुद्ध पुरुष के चरण स्पर्श करने से ही हम धन्य हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि मैं गुरु का गुणगान करने और श्रीराम कथा को कहने के लिये आया हूं। गुरु की महिमा का बखान करते हुये उन्होंने एक फिल्मी गीत गाते हुये कहा कि मैं निगाहों से तेरे चेहरे को हटाऊं कैसे, लुट गये तो आऊं कैसे, कैसे छा रही थी तेरी जुल्फों की महकी हुई घटा, तेरी आंखों से पीया तो पीता ही गया।
आज कथा में मप्र की मंत्री श्रीमती माया सिंह, सहित अन्य मणमान्य व्यक्ति भी मौजूद थे।
