भोपाल ! देश को मलेरिया मुक्त बनाने की मुहिम मध्यप्रदेश के जबलपुर संभाग से शुरू होगी। इसमें सन फार्मास्युटिकल इंडस्ट्रीज द्वारा स्थापित किया जाने वाला इंडिया मलेरिया एलीमिनेशन फाउंडेशन (आईएमईएफ) सक्रिय सहयोग करेगा। फाउंडेशन मानव संसाधन, दवा, जांच और मलेरिया के प्रति जागरूकता बढ़ाने में सहयोग देगा। मलेरिया मुक्त करने के अभियान को लेकर सन फार्मा लिमिटेड के प्रबंध संचालक दिलीप संघवी ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात कर चर्चा की। प्रायोगिक तौर पर अभियान जबलपुर संभाग के जिलों से शुरू होगा। मुख्यमंत्री चौहान के सुझाव पर इसमें शहडोल, सीधी, सिंगरोली और उमरिया जिले को भी शामिल किया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि नवंबर 2014 में म्यांमार में हुई ईस्ट एशिया समिट (ईएएस) में एशिया प्रशांत के देशों को 2030 तक मलेरिया से मुक्त करने का संकल्प लिया गया था। सम्मेलन में एशियान देशों के राज्य प्रमुखों ने भाग लिया था, जिनमें आस्ट्रेलिया, चीन, जापान, कोरिया, न्यूजीलैंड, रूस और अमेरिका शामिल हैं।

मलेरिया, मध्यप्रदेश सहित भारत में एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। इससे ज्यादातर आदिवासी और अंदरूनी क्षेत्र प्रभावित होते हैं। इस बीमारी के कारण बड़ी संख्या में मौत तो होती ही है, इससे अर्थव्यवस्था और उत्पादकता पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है।

आधिकारिक तौर पर बताया गया है कि मध्यप्रदेश के जबलपुर संभाग के आठ जिले मलेरिया से अधिक प्रभावित हैं। संभाग के 10 हजार 586 गांव में लगभग एक करोड़ 17 लाख 78 हजार लोग रहते हैं। मलेरिया उन्मूलन योजना में सबसे पहले इन जिलों को शामिल किया गया है। योजना में शिशुओं, बच्चों और गर्भवती महिलाओं को मलेरिया से बचाने पर विशेष रूप से ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने मलेरिया को समूल नष्ट करने के लिए विशेष कार्य-योजना बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सन फार्मा की विशेषज्ञता, तकनीकी सहयोग और राज्य सरकार के सहयोग से मलेरिया पर पूरी तरह नियंत्रण किया जा सकता है। उन्होंने सन फार्मा और राज्य सरकार के अधिकारियों का संयुक्त दल गठित कर जमीनी चुनौतियों और समस्याओं को देखते हुए रणनीति तैयार करने को कहा।

सन फार्मा की ओर से दिलीप संघवी ने कहा कि राज्य में स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की जरूरी अवसंरचनाएं और व्यवस्थाएं बेहतर हुई हैं और पारदर्शिता बढ़ी है। उन्होंने कहा कि पोलियो की तरह मलेरिया पर संपूर्ण नियंत्रण संभव है और कई देशों ने यह कर दिखाया है। मध्यप्रदेश जैसे बड़े राज्यों में मलेरिया जन-स्वास्थ्य की प्रमुख चुनौती के रूप में विद्यमान है। आदिवासी बहुल क्षेत्रों में इसके प्रकरण ज्यादा मिलते हैं। जनस्वास्थ्य के अलावा यह अर्थ-व्यवस्था को भी प्रभावित करता है।

बैठक में मलेरिया-रोधी दवाइयों की उपलब्धता और दवायुक्त मच्छरदानी के स्थानीय उत्पादन एवं वितरण संबंधी विषयों पर भी चर्चा हुई।

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