इंदौर। मध्यप्रदेश के हनी ट्रैप मामले में आरोपी आरती दयाल और मोनिका को रिमांड के अंतिम दिन आज रविवार को मेडिकल जांच के लिए एमवाय अस्पताल लाया गया। जांच के बाद कोर्ट में पेशी के लिए जा रही आरती ने मीडिया से बात की। आरती ने कहा- हमें क्यों पकडा है, हरभजन को पकडो। मीडिया ने आरती से पूछा कि मामले में और कौन-कौन शामिल है? इस पर आरती ने चुप्पी साध ली। इधर, महापौर मालिनी गौड़ ने नगरीय प्रशासन मंत्री जयवर्धन सिंह से मामले में चर्चा कर निगम अधिकारी हरभजन के निलंबन की अनुशंसा की है। सूत्रों के अनुसार हरभजन सिंह से निगम के सभी विभागों का प्रभार वापस ले लिया गया है।
इससे पहले शनिवार देर रात सीएसपी ज्योति उमठ आरती और मोनिका को लेकर विजय नगर स्थित होटल इन्फिनिटी और होटल श्री पहुंचीं। यहां जांच में सामने आया कि 18 अगस्त को होटल श्री में खुद हरभजन ने रूम बुक करवाया था। 30 अगस्त को होटल इन्फिनिटी में मोनिका और आरती के साथ एक और लडकी रूपा अहिरवार भी आई थी। मोनिका ने हर जगह फर्जी आधार कार्ड सीमा पुत्री राजेश सोनी निवासी जबलपुर के नाम से दिखाया था।

निगम इंजीनियर हरभजन सिंह ने श्वेता स्वप्निल जैन के भाई को इंदौर में पाइप लाइन का ठेका दिलवाने में मदद की थी। पुलिस इस डीलिंग को खंगाल रही है। श्वेता की भोपाल में एक फैक्ट्री भी है। उसने वह फैक्ट्री कैसे डाली और उसका अब तक कितने रुपयों का ट्रांजेक्शन है, इसकी भी जांच की जा रही है। उधर, आरती ने भोपाल के एक आईएएस अफसर को भी हरभजन की तरह ही ब्लैकमेल करना कबूला है।

एसएसपी और एसपी ने महिला थाने पहुंचकर आरती और मोनिका से पूछताछ की, लेकिन निगम इंजीनियर हरभजन सिंह के अलावा किसी भी नाम का खुलासा नहीं किया जा रहा है। श्वेता जैन और बरखा सोनी से जब एटीएस पूछताछ कर रही थी तो कोई भी अफसर वहां नहीं जा रहा था। जैसे ही तीनों जेल गईं तो महिला थाने पर लगी पाबंदियां हटा ली गईं। एटीएस भी दोनों श्वेता और बरखा पर टारगेट कर रही है, क्योंकि उनसे अहम जानकारियां मिली है।

हनी ट्रैप गैंग ने पुलिस को कुछ और साथियों की जानकारी दी है, लेकिन पुलिस पूरी तस्दीक करने के बाद ही उन्हें आरोपी बनाएगी। अभी जिन लोगों के नाम-पते सामने आए हैं, उन्हें ट्रेस किया जा रहा है और पुख्ता सबूत जुटाए जा रहे हैं। फिलहाल पुलिस के लिए सबसे बडा सवाल यह है कि गैंग में पर्दे के पीछे कौन है।

श्वेता स्वप्निल जैन और श्वेता विजय जैन के बारे में सामने आया है कि भोपाल के एक पुराने नामी होटल के जिम में इनका निरंतर आना-जाना पिछले कुछ सालों से हुआ। इसी जिम में कई सीनियर अफसर व उद्योगपति भी जाते थे। इसी जगह को दोनों महिलाओं ने जाल में फांसने का केंद्र बनाया। बताया जा रहा है कि स्वप्निल का इसी होटल की पार्किंग में कुछ दिनों पहले एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी के साथ विवाद हुआ था।

इस बीच इंदौर क्राइम ब्रांच की टीम आरती दयाल की जानकारी जुटाने छतरपुर पहुंची। आरती की गिरफ्तारी के बाद से ही उसका परिवार लापता है। उधर, आरती और मोनिका का रविवार को रिमांड खत्म हो गया। पुलिस को हरभजन के मामले में जितनी पूछताछ करना थी, वह सब की जा चुकी है। अब पुलिस सिर्फ औपचारिकता के नाते रिमांड मांगेगी।

मोबाइल रातभर चालू रखा ताकि संपर्कों का पता चले
पुलिस ने जब तीनों महिलाओं को भोपाल से पकड़ा था तो श्वेता विजय जैन का मोबाइल चालू था। उसका मोबाइल अगले दिन सुबह 9 बजे बाद बंद हुआ। अफसरों का कहना है हम जांच रहे थे कि उसे कितने फोन आते हैं। कुछ फोन की जानकारी खंगाली भी जा रही है। उधर, पुलिस जब तीनों को भोपाल से इंदौर लेकर आई तो विजयनगर के बाद गाड़ी का रूट बदल लिया था। उसे पाटनीपुरा होते हुए टर्न कर महिला थाने लाया गया था। पुलिस को पता चला था कि एक कार उनका पीछा कर रही है।

जिला जेल की अलग-अलग बैरक में रखा तीनों महिला आरोपियों को
लग्जरी लाइफ जीने वाली श्वेता जैन, श्वेता विजय जैन और बरखा सोनी को जिला जेल की अलग-अलग बैरकों में भेज दिया गया। जिला जेल अधीक्षक अदिति चतुर्वेदी के अनुसार तीनों को बता दिया है कि यहां रौब नहीं चलेगा। शनिवार को उनके सारे कागजात बनाए गए, जिसके चलते किसी को भी मिलने की परमिशन नहीं दी गई थी। किसी के भी परिजन ने जेल में मुलाकात के लिए वक्त नहीं मांगा है।

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