विदिशा। मध्यप्रदेश के विदिशा जिले की सिरोंज तहसील में आज बुधवार को एक किसान ने रिश्वत मांगने का आरोप लगाते हुए विरोध करने का एक अनोखा तरीका अपनाया। पीडित किसान भूपत रघुवंशी के मुताबिक, उसने 7 माह में तहसील में कई बार गुहार लगाई लेकिन उसकी आज तक सुनवाई नही हुई है। किसान भूपत का पिता-पुत्र का बंटवारा का प्रकरण है, जिस पर 7 महीने से रिश्वत के कारण कार्रवाई नहीं की जा रही है। सरकार भाजपा की हो या कांग्रेस की काम करने वाले अधिकारी या कर्मचारी तो वे ही है। बिना लेनदेन के कोई काम हो जाए अब संभव नहीं है। जब इन कर्मचारियों व अधिकारियों के यहां छापा पडता है तो करोडों की संपति मिलती है। कांग्रेस की कमलनाथ सरकार भी दावा कर रही है कि प्रदेश को भ्रष्टाचार मुक्त प्रदेश बनाना है। कहना संभव है पर बनाना संभव नहीं है।
इससे गुस्साए किसान भूपत आज बुधवार को अपनी भैंस को लेकर तहसील कार्यालय पहुंच गया और रिश्वत के बदले भैंस देने की बात कही। इस पर तहसील कार्यालय में हंगामा मच गया। इधर, नायब तहसीलदार ने रिश्वत के आरोप को बदनाम करने की साजिश बताते हुए प्रकरण में बिलंब होने पर पटवारी को दोषी करार दिया है।
सिरोंज के अनुविभागीय अधिकारी राजस्व (एसडीएम) संजय जैन ने नायब तहसीदार के विरुद्ध शिकायती आवेदन पर कहा कि किसान से प्राप्त आवेदन में रिश्वत से संबंधी कोई सबूत नही दिए गए हैं। रिश्वत का मौखिक आरोप लगाया गया है। साथ ही पिता-पुत्र के पारिवारिक बंटवारे में 7 माह का बिलंब हुआ है, जो राजस्व नियमों का उल्लंघन है, ये बड़ी गलती है और इसकी जांच के आदेश दिए गए हैं।
