इंदौर। मध्यप्रदेश में नेताओं और पुलिस-प्रशासनिक अधिकारियों के बीच हड़कंप मचा देने वाले हनी ट्रैप केस में अब एक चौंकाने वाला मोड़ आ गया है. इस मामले की मुख्य आरोपी मोनिका अब पुलिस की ओर से अदालत में गवाही देगी. मोनिका अब तक जहां इस मामले में मुख्य आरोपी मानी जा रही थी, वहीं अब वह सरकारी गवाह बन गई है. इंदौर की एसएसपी रुचिवर्धन मिश्रा ने गुरुवार की देर शाम मीडिया को यह जानकारी दी। गौरतलब है कि बुधवार को मोनिका के पिता ने इसी मामले को लेकर ह्यूमन ट्रैफिकिंग (मानव तस्करी) का केस दर्ज कराया है.
इंदौर की एसएसपी रुचिवर्धन मिश्रा के मोनिका को लेकर दिए गए बयान के बाद हनी ट्रैप मामले की संवेदनशीलता और बढ़ गई है. दरअसल, मोनिका के ऊपर ही सबसे पहले इस मामले में ब्लैकमेल करने और पैसा वसूली का आरोप लगा था। इंदौर नगर निगम के इंजीनियर हरभजन सिंह ने जिस महिला के खिलाफ पुलिस में शिकायत दी थी, वह मोनिका ही है. हरभजन की शिकायत के आधार पर ही इंदौर पुलिस ने पहले मोनिका और उसकी एक अन्य साथी को गिरफ्तार किया। इसके बाद इन दोनों की निशानदेही पर भोपाल से मामले में तीन अन्य महिलाओं और एक पुरुष की गिरफ्तारी हुई थी. इंदौर की एसएसपी ने गुरुवार को कहा कि मोनिका अभी कॉलेज में पढ़ती है. वह फर्स्ट ईयर की स्टूडेंट है और उसने खुद को भी इस मामले में पीडित बताया है. एसएसपी ने कहा कि पुलिस मोनिका को इस मामले की सुनवाई के दौरान बतौर गवाह अदालत में पेश करेगी।
हनी ट्रैप मामले में मुख्य आरोपी मोनिका के सरकारी गवाह बन जाने से अब इस केस के कई छुपे हुए राज बाहर आ सकते हैं. दरअसल, इस केस में अब तक जितनी भी गिरफ्तारियां हुई हैं, उनमें सबसे अहम मोनिका की गिरफ्तारी को ही माना जा रहा है. चूंकि मामले की जांच कर रही एसआईटी को अभी तक यह पता नहीं चला है कि हनी ट्रैप गैंग का मुख्य संचालक कौन है, इसलिए मोनिका के बयान पर ही पुलिस की उम्मीदें टिकी हुईं हैं. वहीं, इस मामले में मध्यप्रदेश के कई नेताओं और नौकरशाहों के नाम भी सामने आने की बात कही जा रही है, इसलिए मोनिका के अदालत में आने वाले बयान से इस केस के कई छुपे हुए रहस्य सामने आने की उम्मीद की जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक, उक्त दो कंपनियों में से एक की निदेशक आरती दयाल है। आरोप है कि आरती दयाल ने ही कॉलेज की लड़कियों को वीआईपी के साथ हम-बिस्तर होने के लिए मजबूर किया था। इस कंपनी प्रबंध निदेशक स्वेता जैन है। बता दें कि देश के सबसे बड़ा स्कैंडल माने जा रहे इस वारदात का खुलासा इसी साल 19 जनवरी को हुआ था। इस मामले की जांच के लिए एसआईसी का गठन किया गया है। मध्यप्रदेश सरकार के मंत्री जीतू पटवारी की मानें तो सरकार इस मामले की तह तक जांच कराना चाहती है।
जांच में पाया गया है कि स्वेता जैन रियल एस्टेट में एंट्री लेते हुए एक कंस्ट्रक्शन कंपनी दीप्तिमंथम एंटरप्राइज प्राइवेट लिमिटेड बनाई। इस कंपनी ने कुछ आईएएस अधिकारियों की अनुकंपा से बड़े कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट भी हासिल किए। यही नहीं छह महीने बाद 26 जुलाई को स्वेता जैन ने सॉफ्टवेयर और कंप्यूटर हार्डवेयर से संबंधित कॉन्ट्रैक्टों के लिए कथित तौर पर एक और कंपनी बनाई। इस कंपनी में आरती दयाल निदेशक बनाया गया जबकि स्वेता जैन प्रबंध निदेशक पद की जिम्मेदारी संभाली।
समाचार एजेंसी आइएएनएस ने जांच के हवाले से बताया है कि श्वेता जैन की दोस्त और स्कैंडल में सहयोगी बरखा सोनी ने एक एनजीओ समर्थ समाज सेवा संस्थान बनाया ताकि हनी ट्रैप में उगाही की गई रकम को कथित तौर पर सुरक्षित किया जा सके। आइएएनएस की सनसनीखेज रिपोर्ट में कहा गया है कि श्वेता नेताओं को साधने में लगी थी तो दूसरी ओर बरखा का नई दिल्ली के एक पार्टी मुख्यालय में लगातार आना जाना रहा। यही नहीं बरखा की फेसबुक वॉल भी दिग्गज नेताओं की तस्वीरों से भरी पड़ी है।
