ग्वालियर। चंबल के बीहडों में कभी डकैतों व पुलिस के बीच होने वाली मुडभेडों के दौरान चलने वाली गोलियों की आवाज कानों में गूंजती थी, लेकिन अब इन बीहडों में खेती की संभावनायें तलाशी जा रही है। चंबल में हर साल बीहड बढते ही जा रहे है। यहां की 8 हजार हेक्टेयर जमीन कटाव के कारण बीहड में तब्दील हो रही है, लेकिन किसान टेरिस लेवलिंग कर बीहड की जमीन को उपयोगी बना सकते है। ये बीहड जब समतल हो जाऐंगे तो किसान भरपूर उत्पादन कर लाभान्वित हो सकते है। यह बात भिण्ड जिले के अटेर विकास खण्ड के पावई गांव में भारत सहित दुनियाभर के देशों से आए 140 कृषि वैज्ञानिकों के भ्रमण के दौरान राजमाता विजयाराजे कृषि विश्वविद्यालय ग्वालियर के डॉ. एसके वर्मा ने कही। भिण्ड-दतिया संसदीय क्षेत्र के भाजपा सांसद डॉं. भागीरथ प्रसाद के साथ कृषि वैज्ञानिकों का एक दल कल पावई के बीहडों में पहुंचा था।
भिण्ड जिले के पावई में पहुंचा कृषि वैज्ञानिकों के दल में शामिल स्विटजरलैंड से आए कृषि वैज्ञानिक डॉं. एसके गुप्ता को राजमाता विजयाराजे सिन्धिया कृषि विश्वविद्यालय ग्वालियर के डॉ. एसके वर्मा ने बताया चंबल के बीहडों की अपेक्षा क्वारी के बीहडों में अच्छी संभावनाएं है। डॉं. वर्मा ने कहा कि उन्होंने ऐसे गांव में मिट्टी परीक्षण और रिसर्च के लिए लैब बनाई है। रिपोर्ट के अनुसार बीहड की मिट्टी रेतीली है। इस कारण से पानी आने से कटाव होता है। इस मिट्टी के नीचे पानी चलता है। डॉं. वर्मा ने कहा कि हम बीहड में खेतों के 1 से डेढ बीघा खेत के प्लॉट को चारों ओर बंधान बनाकर कटाव से रोक सकते है। पावई में जर्मनी से डॉं. अलरिच, स्विटजरलैंड से डॉं. एसके गुप्ता, राजमाता विजयाराजे कृषि विश्वविद्यालय ग्वालियर के डॉं. एसएस तोमर, डॉं. एसके वर्मा, डॉं. एसके श्रीवास्तव, डॉं. एचएस यादव, डॉं. जगदीश प्रसाद, डॉं. एसएस तोमर, जेएनयू दिल्ली से डॉं. पद्मिनी पनी और नेपाल, अफगानिस्तान, जापान व अन्य देशों के 140 कृषि वैज्ञानिक बीहड में संभावनाएं तलाशने आए।
राजमाता विजयाराजे कृषि विश्वविद्यालय ग्वालियर के डॉं. एसएस तोमर ने बताया कि बीहड को उपयोगी बनाने में हम ऐसे किसानों को जोड सकते है जिन्होंने बीहड की जमीन को काटकर उत्पादन लायक बनाया है। वैज्ञानिकों ने ऐसे ग्रामीणों से भी मुलाकात की। कृषि वैज्ञानिक डॉं. एसके वर्मा ने बताया कि टेरिस लेवलिंग करने में प्रति हेक्टेयर 35 से 40 हजार रुपए खर्च कर बीहड को उपयोगी जमीन में तब्दील कर सकते है। डॉं. वर्मा ने कहा कि यह खुशी की बात है कि चंबल संभाग के भिण्ड जिले में क्वारी नदी के किनारे किसानों ने बीहड को खेती लायक बनाया है। डॉं. वर्मा ने बताया कि यह रिपोर्ट 2015 में सेटेलाइट से ऐरियल सर्वे की है। कृषि वैज्ञानिक डॉ एसके वर्मा ने बताया कि भिण्ड क्षेत्र में एक लाख हैक्टेयर बीहड भूमि को उपजाऊ बनाया जा सकता है। साथ ही टापू समतल करने के बाद कई प्रकार की फसल ली जा सकती है। उन्होंने कहा कि बीहड क्षेत्र में पानी की कोई कमी नहीं है। बीहड सुधार के अन्तर्गत कृषि, उद्यानिकी, वन, पशु पालन विभाग के माध्यम से कई प्रकार के उपयोगी प्रयोग हो सकते है।
सांसद डॉं. भागीरथ प्रसाद ने कहा कि चंबल के बीहड में बांस की खेती की जा सकती है। सांसद ने कहा कि दिल्ली में उनसे कई लोगों ने कहा कि चंबल के बीहड में बांस का उत्पादन किया जाए तो अच्छी खपत होगी। वैज्ञानिकों ने कहा कि चंबल में बांस के साथ ग्वारपाठा, टैªडिशनल क्रॉप, कीमों, मौसमी, संतरे, नीबू और अमरुद का उत्पादन किया जा सकता है। सांसद डॉ भागीरथ प्रसाद ने कहा कि चंबल एवं क्वारी नदी के बीहडो में खेती की अपार संभावनाऐं है। बीहडो के सुदृढीकरण और फसलो की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए 1100 करोड रूपए स्वीकृत किए जा रहे है। जिसमें 200 करोड रूपए म.प्र. सरकार और 900 करोड रूपए केन्द्र सरकार द्वारा वर्ल्ड बैंक के सहयोग से प्रदान करने की पहल की जा रही है। उन्होंने कहा कि क्वारी नदी के बीहड में खेती करना आसान है। परन्तु चंबल नदी के बीहडो में भूमि को समतल करने के बाद उपजाउ बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि बीहड के टापू के टॉप को डाउन आसानी से किया जा सकता है।
