भोपाल। कांग्रेस की 15 माह तक चली सरकार में उपचार के लिए अस्पतालों को दी गई राशि में गड़बड़ी की शिकायत की जांच सीएम सचिवालय कर रहा है। अस्पतालों पर आरोप है कि उनके द्वारा सीएम स्वेच्छानुदान और आयुष्मान योजना से उपचार की राशि ली गई है। इसकी पुष्टि के लिए उन लोगों को सीधे फोन कर जानकारी ली जा रही है जिन्हें मदद दी गई थी। उधर महिला हेल्प डेस्क शुरू किए जाने के उपरांत एक माह में महिलाओं की मदद से संबंधित केस की जानकारी पीएचक्यू ने तलब की है।

हेलो… आपको वर्ष 2019 में मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान से इलाज के लिए राशि मंजूर हुई थी, यह राशि आपको या अस्पताल को मिली। ऐसा फोन इन दिनों मुख्यमंत्री के यहां से हर उस व्यक्ति के पास पहुंच रहे हैं, जिन्हें कमलनाथ के मुख्यमंत्री काल में इलाज के लिए मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान से मदद मिली है।

सूत्रों की मानी जाए तो शासन के पास तक यह शिकायत पहुंची है कि कमलनाथ सरकार में मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान राशि के नाम पर बड़ा गोलमाल हुआ है। अस्पतालों ने मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान के नाम से राशि ली और केंद्र सरकार की आयुष्मान भारत योजना से भी लाभ ले लिया। जबकि इलाज में इतना पैसा ही खर्च नहीं हुआ। मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान का पैसा अस्पतालों के पास पहुंचा, लेकिन मरीज या उसके परिजनों को इसकी जानकारी नहीं रही। वहीं मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान भी फर्जी तरह से देने की शिकायतें सरकार के पास तक पहुंची है। कमलनाथ के समय इन मद से करोड़ों रुपए का भुगतान किया गया था।

इस संबंध में आई शिकायतों के चलते प्रदेश सरकार ने कमलनाथ के समय में जारी हुई मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान राशि को लेकर अब सीधे ही लाभांवितों से बात करना शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री के यहां से इस संबंध में फोन आता है। यह फोन उस नंबर पर आता है, जो राशि लेने के लिए फार्म में दिया गया था। इस नंबर पर फोन कर यह पूछा जा रहा है कि मरीज की हालत कैसी है। उन्हें महीना और वर्ष बताया जाता है कि उस वक्त आपकों राशि मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान से दी गई थी, क्या वो आपको या इलाज के दौरान अस्पताल को मिली या नहीं।

यह भी बताया जाता है कि इस जांच में कमलनाथ के कार्यकाल के घोटाले को सामने लाये जाने की भी तैयारी है। दरअसल शिवराज सिंह चौहान हमेशा यह आरोप लगाते रहे हैं कि कमलनाथ के समय बल्लभ भवन दलालोें का अड्डा बन गया था और मुख्यमंत्री स्वैच्छानुदान की राशि बल्लभ भवन से ही मंजूरी होती थी। इसके जरिए भी कमलनाथ पर लगाए जा रहे आरोपों को साबित करने का प्रयास माना जा रहा है। वहीं कुछ अस्पतालों पर भी इस जांच के जरिए शिकंजा कसने की तैयारी में प्रदेश सरकार है। यदि अस्पतालों के द्वारा आयुष्मान भारत योजना में घपला मिलता है तो मामला पुलिस तक पहुंच सकता है। मेडिकल क्षेत्र और जनता से सीधे जोड़े होने के चलते इस मामले में सरकार सावधानी से एक-एक कदम आगे बढ़ा रही है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *