भोपाल। पूर्व केन्द्रीय मंत्री एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया मंदसौर-नीमच में बाढ पीडितों से मिले। इस दौरान उन्होंने फसल नुकसान का जायजा लिया और नयागांव में कहा कि वे राज्य सरकार के अब तक के सर्वे से संतुष्ट नहीं हैं। मौसम अब खुला हुआ है, एक बार फिर से सभी पटवारी और तहसीलदार एक-एक पीडित से मिलें और पुनः सर्वे करें। उन्हांेने कहा कि आपदा पीडित किसानों को तीन तरह से राहत मिलनी चाहिए। राजस्व विभाग, बीमा कंपनी और केंद्र के राहत आपदा कोष से इन्हें मदद दी जाए।
जिले में आई बाढ के 10 दिन बाद सोमवार को मुख्यमंत्री कमलनाथ ने दो घंटे तक बाढग्रस्त इलाकों का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने बाढ प्रभावित पयाखेडी, बेटीखेडी में हालात देखे। कयामपुर में सभा कर बाढ़ प्रभावितों की मदद का भरोसा दिया। उन्होंने 31 अक्टूबर तक सभी पीडितों के खातों में राहत राशि पहुंचने की बात कही। सीएम नीमच जिले के रामपुरा भी पहुंचे और हालात का जायजा लिया।
कयामपुर की सभा में मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा हमारी सरकार नाटक और कलाकारी की नहीं है। हम यह चाहते हैं कि वादे पूरे हों। हमारी सरकार को दो दिन बाद नौ महीने होंगे। इसमें भी आचार संहिता के दिन काट दिए जाएं तो हमने 6 महीने में दो लाख रुपए तक के किसानों के ऋण माफ किए हैं। किसानों के तीन से चार खाते हैं। ऐसे में निर्धारण करना कठिन हो जाता है। उन्होंने हमें खाली खजाना दिया। ऐसा प्रदेश दिया जो कि बेरोजगारी, बलात्कार और किसान आत्महत्या में नंबर वन था। ये उनके खुद के वित्तमंत्री कहते हैं कि सरकार का खजाना खाली है, यह क्या कर सकेंगे। मैं उन्हें बता दूं कि यदि केंद्र सरकार साथ नहीं देगी तो भी हम वादे पूरे करेंगे। सीएम ने बगैर सर्वे के मुआवजा राशि वितरित किए जाने की घोषणा करते हुए सभी बाढ पीडितों के खाते में 31 अक्टूबर तक राहत राशि पहुंचने की घोषणा की। सीएम ने पूर्व सीएम द्वारा बिजली के बिल नहीं भरने की बात को जुमला बताया और कहा कि यह कलाकारी की राजनीति शिवराज करें। उन्होंने कहा कि शिवराज सुन लें वे दिल्ली जाएं और जनता को बताएं कि वे कितनी मदद लाए हैं। सीएम ने बताया प्रदेश में करीब 10 से 11 हजार करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। इसका सर्वे केंद्र की टीम आकर चुकी है।
